
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच एक ऐसा कूटनीतिक खेल चल रहा है, जिसने सबका ध्यान खींच लिया है। एक तरफ जहां क्षेत्र में संघर्ष और अस्थिरता बढ़ रही है, वहीं दूसरी ओर सऊदी अरब और कतर ने पाकिस्तान को करीब 5 अरब डॉलर की आर्थिक मदद देने का भरोसा दिया है।
सबसे बड़ा सवाल यही है, जब संयुक्त अरब अमीरात ने पाकिस्तान से अपना कर्ज वापस मांग लिया है, तब सऊदी और कतर क्यों आगे आए? इसके पीछे चार बड़े कारण समझना जरूरी है।
मिडिल ईस्ट में सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात के बीच लंबे समय से रणनीतिक प्रतिस्पर्धा चल रही है। यमन और हॉर्न ऑफ अफ्रीका जैसे इलाकों में दोनों देश अपनी पकड़ मजबूत करना चाहते हैं। इसी दौरान पाकिस्तान ने यूएई के बजाय सऊदी अरब के साथ रक्षा समझौता किया, जिससे यूएई नाराज हो गया। यमन में दक्षिणी संक्रमणकालीन परिषद को लेकर भी दोनों देशों के बीच टकराव देखने को मिला है।
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पिछले साल हुए रक्षा समझौते के बाद पाकिस्तान ने करीब 13,000 सैनिक और कई लड़ाकू विमान सऊदी अरब भेजे हैं। यह तैनाती किंग अब्दुलअज़ीज़ एयर बेस पर की गई है। इसके अलावा, ईरान से बढ़ते खतरे के बीच पाकिस्तान ने सऊदी को मिसाइल डिफेंस सिस्टम भी उपलब्ध कराया है। यही वजह है कि सऊदी अरब ने 2018 का पुराना कर्ज फिलहाल वापस न मांगने का फैसला लिया और अब नई आर्थिक मदद भी दे रहा है।
हाल के दिनों में Iran और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच तनाव को कम करने के लिए जो बातचीत हुई, उसमें पाकिस्तान एक अहम कड़ी के रूप में उभरा। सऊदी और कतर चाहते हैं कि क्षेत्र में जल्द शांति स्थापित हो, ताकि होर्मुज जैसे अहम रास्ते खुले रहें और ऊर्जा सप्लाई बाधित न हो। यही वजह है कि पाकिस्तान की ‘मध्यस्थ’ भूमिका की कीमत उसे आर्थिक मदद के रूप में मिल रही है।
मिडिल ईस्ट की जंग सिर्फ एक देश तक सीमित नहीं है। Yemen और Sudan में चल रहे प्रॉक्सी वॉर ने हालात और जटिल बना दिए हैं। सूडान में 2023 से जारी संघर्ष में लाखों लोग प्रभावित हुए हैं। Rapid Support Forces को लेकर यूएई पर भी सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में पाकिस्तान का सऊदी के साथ खुलकर खड़ा होना, यूएई को खटक रहा है।
United Arab Emirates ने पाकिस्तान को 3.5 अरब डॉलर का कर्ज लौटाने के लिए सख्त समय सीमा दी है। पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण वह यह रकम तुरंत नहीं चुका सकता था। ऐसे में सऊदी अरब और कतर आगे आए, ताकि पाकिस्तान इस दबाव से निकल सके। सरल शब्दों में कहें तो पाकिस्तान अब यूएई का कर्ज, सऊदी-कतर से मिले पैसों से चुकाने की तैयारी में है।
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