सुष्मिता देव ने क्यों छोड़ी TMC, ममता बनर्जी को जोर का झटका देने वाली दूसरी राज्यसभा सांसद

Published : Jun 10, 2026, 02:16 PM IST
Sushmita Dev

सार

सुष्मिता देव के इस्तीफे की असली वजह क्या है? क्या सुष्मिता देव BJP में शामिल होने वाली हैं? सुष्मिता देव और हिमंत बिस्वा सरमा की मुलाकात का क्या मतलब है? सुष्मिता देव कौन हैं और उनका राजनीतिक सफर कैसा रहा है?

Sushmita Dev Resigns From TMC: पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के लिए मुश्किलें लगातार बढ़ती नजर आ रही हैं। बुधवार को पार्टी की वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव ने अपने पद से इस्तीफा देने के साथ-साथ TMC छोड़ने का भी ऐलान कर दिया। उनके इस फैसले को ममता बनर्जी के लिए एक और बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब हालिया विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (BJP) से मिली हार के बाद ममता बनर्जी अपनी पार्टी को एकजुट रखने की कोशिश कर रही हैं।

TMC छोड़ने वाली दूसरी राज्यसभा सांसद बनीं सुष्मिता देव

सुष्मिता देव राज्यसभा की दूसरी TMC सांसद हैं जिन्होंने हाल के दिनों में पार्टी से इस्तीफा दिया है। इससे पहले वरिष्ठ नेता सुखेंदु शेखर रॉय भी पार्टी छोड़ चुके हैं। रॉय ने इस्तीफा देते समय TMC पर "व्यापक भ्रष्टाचार" और "अराजक शासन" जैसे गंभीर आरोप लगाए थे। उनके अनुसार, पार्टी और सरकार दोनों के खिलाफ जनता में नाराजगी लगातार बढ़ रही थी।

सुष्मिता देव ने क्यों छोड़ी TMC?

जब पत्रकारों ने सुष्मिता देव से पार्टी छोड़ने की वजह पूछी तो उन्होंने इसे लंबी कहानी बताया। उन्होंने कहा कि राजनीति में हर बात सार्वजनिक करना जरूरी नहीं होता। उनके अनुसार, वह ऐसी स्थिति में नहीं रहना चाहती थीं, जहां उन्हें एक साथ दो अलग-अलग राजनीतिक दिशाओं में काम करना पड़े। सुष्मिता देव ने कहा कि उनकी परवरिश और राजनीतिक सोच उन्हें यह अनुमति नहीं देती कि वह एक पार्टी में रहकर किसी दूसरी पार्टी के हित में काम करें। इसी वजह से उन्होंने TMC छोड़ने का फैसला लिया।

ममता बनर्जी पर टिप्पणी करने से किया इनकार

हालांकि सुष्मिता देव ने पार्टी छोड़ दी है, लेकिन उन्होंने ममता बनर्जी के खिलाफ कोई बयान देने से इनकार कर दिया। उन्होंने साफ कहा कि वह ममता बनर्जी के बारे में कोई टिप्पणी नहीं करेंगी। इससे संकेत मिलता है कि पार्टी छोड़ने के बावजूद वह व्यक्तिगत स्तर पर किसी विवाद में नहीं पड़ना चाहती हैं।

कौन हैं सुष्मिता देव?

सुष्मिता देव राष्ट्रीय राजनीति का एक जाना-पहचाना चेहरा हैं। वह कभी ऑल इंडिया महिला कांग्रेस की अध्यक्ष रह चुकी हैं। साल 2019 के लोकसभा चुनाव में असम की सिलचर सीट से उन्हें BJP उम्मीदवार राजदीप रॉय के खिलाफ हार का सामना करना पड़ा था। इसके बाद उन्होंने कांग्रेस पार्टी से इस्तीफा दे दिया। वर्ष 2021 में उन्होंने तृणमूल कांग्रेस का दामन थामा और जल्द ही पार्टी की प्रमुख राष्ट्रीय प्रवक्ताओं में शामिल हो गईं। इस्तीफा देने तक वह TMC की राष्ट्रीय प्रवक्ता की जिम्मेदारी भी संभाल रही थीं।

हिमंत बिस्वा सरमा के साथ तस्वीरों ने बढ़ाई अटकलें

सुष्मिता देव के इस्तीफे के बाद राजनीतिक गलियारों में नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं। उनके इस्तीफे के तुरंत बाद असम के मुख्यमंत्री और BJP के वरिष्ठ नेता हिमंत बिस्वा सरमा के साथ उनकी मुलाकात की तस्वीरें सामने आईं। इन तस्वीरों के सामने आने के बाद उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं, हालांकि उन्होंने अभी तक अपने अगले कदम को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है।

विधानसभा चुनाव हारने के बाद बढ़ीं ममता बनर्जी की चुनौतियां

हालिया विधानसभा चुनाव में BJP के हाथों सत्ता गंवाने के बाद ममता बनर्जी अपने राजनीतिक करियर की सबसे कठिन परिस्थितियों में घिरी हुई दिखाई दे रही हैं। लगातार तीन कार्यकाल तक राज्य की सत्ता संभालने वाली ममता बनर्जी अब पार्टी के भीतर बढ़ती असंतुष्टि और नेताओं के पलायन की चुनौती का सामना कर रही हैं।

TMC में बढ़ी बगावत, कई नेताओं ने दिखाए अलग तेवर

पार्टी के अंदर असंतोष लगातार बढ़ता दिखाई दे रहा है। पिछले सप्ताह विधायक रिताब्रता बनर्जी ने 58 विधायकों के समर्थन के साथ राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता पद पर दावा पेश किया था। इसके अलावा सांसद काकोली घोष ने भी 19 बागी सांसदों के समर्थन से अलग राजनीतिक रास्ता अपनाने और BJP के नेतृत्व वाले नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस (NDA) को समर्थन देने की इच्छा सार्वजनिक रूप से जताई थी। इन घटनाओं ने TMC नेतृत्व की चिंता और बढ़ा दी है।

TMC के सामने एकता बचाने की बड़ी चुनौती

सुष्मिता देव के इस्तीफे ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या तृणमूल कांग्रेस अपने नेताओं और सांसदों को एकजुट रखने में सफल हो पाएगी। लगातार सामने आ रहे इस्तीफे, बगावती सुर और विपक्षी दलों की सक्रियता ने ममता बनर्जी की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। आने वाले दिनों में पार्टी नेतृत्व किस तरह इस संकट से निपटता है, इस पर पूरे देश की नजर बनी रहेगी।

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