21 साल में बन सकेंगे सांसद/ विधायक? क्या Gen Z के लिए राजनीति में एंट्री की उम्र बदलने वाली है?

Published : Jul 26, 2026, 04:51 PM IST
Heavy Police Deployment as CJP Supporters Protest at Jantar Mantar, Demand Dharmendra Pradhan’s Resignation Over NEET Paper Leak Allegations

सार

Gen Z in Politics : दिल्ली के जंतर-मंतर पर आंदोलन करनेवाले जेन-जी ने साबित कर दिया है क वह एक बार जो सोच ले उसे अंजाम देकर रहते हैं। अब सियासी गलियारों में चर्चा होने लगी है कि विधानसभा और संसद चुनाव लड़ने की न्यूनतम उम्र 25 से घटाकर 21 साल कर देना चाहिए।

नई दिल्ली: जंतर मंतर पर आंदोलन करने वाले युवाओं और Gen Z के जज्ब-जुनून की हर तरफ तारीफ हो रही है। कैसे उन्होंने हड़ताल करके मोदी सरकार के शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के लिए मजबूर कर दिया है। अब सियासी गलियारों में चर्चा होने लगी है कि दिल्ली में आंदोलन करने ले यह जेन-जी राजनीति में भी कदम रखेंगे। इसी को लेकर  तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने रविवार को एक बड़ी मांग उठाई है। 

25 नहीं, 21 साल होनी चाहिए विधायक-सांसद की उम्र

  • सीएम रेवंत रेड्डी ने कहा है कि विधानसभा और संसद का चुनाव लड़ने के लिए न्यूनतम उम्र 25 साल से घटाकर 21 साल कर देनी चाहिए। उनका तर्क है कि जो युवा सिविल सर्वेंट बन सकते हैं और स्थानीय निकायों में चुने जा सकते हैं, उन्हें विधायक (MLA) और सांसद (MP) बनने का भी हक मिलना चाहिए।
  • ANI से बात करते हुए रेड्डी ने बताया कि वो इस मुद्दे को संसद तक ले जाना चाहते हैं। इसके लिए वो अगस्त में तेलंगाना विधानसभा में चुनाव लड़ने की उम्र कम करने के लिए एक प्रस्ताव लाएंगे।
  • उन्होंने कहा, "जब वोट देने की उम्र 21 साल थी, तब विधानसभा और संसद का चुनाव लड़ने की न्यूनतम उम्र 25 साल थी। आज वोट देने की उम्र 18 साल है। मैं चाहता हूं कि चुनाव लड़ने की न्यूनतम उम्र 25 से घटाकर 21 कर दी जाए।"
    मुख्यमंत्री ने तर्क दिया कि मौजूदा उम्र सीमा पर फिर से विचार करने की जरूरत है, क्योंकि युवाओं को पहले से ही सार्वजनिक जीवन और प्रशासन में बड़ी जिम्मेदारियां दी जा रही हैं।

जब 21 में IAS और IPS बन सकते हैं तो राजनेता क्यों नहीं?

  • सीएम ने आगे कहा, "21 साल की उम्र में युवा IAS और IPS अफसर, सिविल सर्वेंट, मेयर और ग्रामीण-शहरी निकायों में चुने हुए प्रतिनिधि बन सकते हैं। तो फिर वे विधानसभा और संसद का चुनाव लड़ने के योग्य क्यों नहीं होने चाहिए? इसीलिए मैं अगस्त में अपनी राज्य विधानसभा में एक प्रस्ताव लाना चाहता हूं ताकि यह मुद्दा लोकसभा और राज्यसभा में उठाया जा सके।
  • मुख्यमंत्री ने कहा कि तेलंगाना विधानसभा में प्रस्तावित प्रस्ताव पहला कदम होगा, जिसके बाद वह इस मुद्दे को लोकसभा और राज्यसभा में उठाने की कोशिश करेंगे।

तेलंगाना विधानसभा में पेश होगा पहला प्रस्ताव

  • तेलंगाना के सीएम ने कहा-  ANI को बताया, "पहले, मैं अपनी राज्य विधानसभा में एक प्रस्ताव पारित करना चाहता हूं। उसके बाद, मैं अपनी पार्टी के नेताओं, खड़गे जी और राहुल जी से मिलकर यह प्रस्ताव पेश करना चाहता हूं। इसके अलावा, मैं INDIA गठबंधन के सभी दलों के नेताओं से भी मिलना चाहता हूं। फिर हम देखेंगे कि आगे क्या होता है। मैं इसे आगे बढ़ाने की पूरी कोशिश करूंगा।"
  • परिसीमन और महिला आरक्षण बिल पर एक सवाल के जवाब में रेड्डी ने कहा कि यह मामला अभी तक बिजनेस एडवाइजरी कमेटी (BAC) के सामने नहीं आया है, और जब इन पर औपचारिक रूप से चर्चा होगी, तभी वह कोई टिप्पणी करेंगे।
    उन्होंने कहा, “परिसीमन और महिला आरक्षण बिल के बारे में मैंने सिर्फ सुना है। वे अभी तक बिजनेस एडवाइजरी कमेटी (BAC) में नहीं आए हैं। एक बार जब वहां चर्चा हो जाएगी और संबंधित कागजात बांटे जाएंगे, तो मैं टिप्पणी कर पाऊंगा। तब तक, मैं इंतजार करना पसंद करूंगा।”

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