
लखनऊ। “भारत की आत्मा गांवों में बसती है”- इसी सोच को आधार बनाकर उत्तर प्रदेश सरकार ने बीते नौ वर्षों में गांव और किसान को विकास की मुख्य धुरी बनाया है। सरकार का मानना है कि जब गांव मजबूत होंगे और अन्नदाता किसान आत्मनिर्भर बनेंगे, तभी प्रदेश और देश दोनों समृद्ध होंगे।
योगी सरकार ने शहर और गांव के बीच की दूरी कम करने, ग्रामीण क्षेत्रों से पलायन रोकने और स्थानीय रोजगार बढ़ाने पर लगातार काम किया है। बजट 2026-27 भी इसी दिशा में आगे बढ़ता हुआ दिखाई देता है। इसमें खेती-किसानी, ग्रामीण इन्फ्रास्ट्रक्चर और कृषि आधारित उद्यमिता को बढ़ावा दिया गया है।
साल 2017 में सत्ता संभालने के बाद सरकार ने 36 हजार करोड़ रुपये की किसान कर्जमाफी की। इसके साथ ही केंद्र सरकार द्वारा पीएम किसान सम्मान निधि के तहत 94,668.58 करोड़ रुपये किसानों के खातों में भेजे गए। डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से योजनाओं का पैसा सीधे किसानों के बैंक खातों में पहुंचाया गया, जिससे बिचौलियों की भूमिका खत्म हुई।
बजट 2026-27 में कृषि योजनाओं के लिए 10,888 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 20 प्रतिशत अधिक है। मुख्य प्रावधान इस प्रकार हैं:
ये सभी कदम कृषि के तकनीकी उन्नयन और किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में अहम माने जा रहे हैं।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने के लिए सरकार ने कई योजनाएं लागू की हैं। प्रदेश के सभी जिलों में 94,300 हेक्टेयर क्षेत्र में नेशनल मिशन ऑन नेचुरल फॉर्मिंग योजना चलाई जा रही है। इसके लिए 298 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
निजी नलकूपों को लगातार बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए 2400 करोड़ रुपये प्रस्तावित हैं। पं. दीनदयाल उपाध्याय किसान समृद्धि योजना के लिए लगभग 103 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है। इन योजनाओं से किसानों को मजबूत सपोर्ट सिस्टम मिल रहा है और खेती को अधिक लाभकारी बनाने की दिशा में काम हो रहा है।
2017 के बाद गन्ना किसानों की स्थिति में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। सरकार ने अब तक 3.04 लाख करोड़ रुपये से अधिक का रिकॉर्ड गन्ना मूल्य भुगतान किया है। पेराई सत्र 2025-26 के लिए गन्ने के दाम में 30 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की गई है।
इस बढ़ोतरी से किसानों को लगभग 3,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त लाभ मिलेगा। योगी सरकार के कार्यकाल में यह चौथी बार है जब गन्ना मूल्य में वृद्धि की गई है। इससे ग्रामीण अर्थतंत्र को भी नई ऊर्जा मिलेगी।
सरकार ने दुग्ध और मत्स्य पालन को भी बढ़ावा दिया है। प्रदेश में 19 दुग्ध संघों के माध्यम से दुग्धशाला विकास कार्यक्रम चलाया जा रहा है। मथुरा में 30 हजार लीटर की प्रस्तावित डेयरी परियोजना को बढ़ाकर अब 1 लाख लीटर प्रतिदिन क्षमता का डेयरी प्लांट स्थापित करने का प्रस्ताव है।
दुग्ध संघों के सुदृढ़ीकरण और पुनर्जीवन पर भी विशेष जोर दिया गया है। छुट्टा गोवंश की समस्या के समाधान के लिए 2,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा:
इन पहलों से किसानों के जीवन स्तर में सकारात्मक बदलाव आया है।
धान खरीद अभियान के जरिए सरकार किसानों की आर्थिक मजबूती सुनिश्चित कर रही है। सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर धान की खरीद कर रही है और भुगतान सीधे DBT के माध्यम से बैंक खातों में किया जा रहा है। 18 फरवरी 2026 दोपहर 12 बजे तक 12.78 लाख किसानों ने पंजीकरण कराया है। 4,869 क्रय केंद्रों के माध्यम से 10.17 लाख से अधिक किसानों से 60.98 लाख मीट्रिक टन धान की खरीद की जा चुकी है। इससे किसानों को समय पर भुगतान मिल रहा है और पारदर्शिता बढ़ी है।
किसान नेता रविंद्र कुमार सिंह के अनुसार, सरकार ने गांव और किसान को समृद्धि का आधार बनाकर धरातल पर काम किया है। कृषि को आधुनिक तकनीक और उद्यमिता से जोड़ने के प्रयास किए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि किसी भी प्रदेश के समावेशी विकास के लिए जरूरी है कि किसान केवल सरकारी अनुदानों पर निर्भर न रहें, बल्कि अर्थव्यवस्था में बराबर की भागीदारी निभाएं। सरकार की नीतियां गांव और शहर के बीच की खाई कम करने और पलायन रोकने में मदद कर रही हैं।
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