AI in Healthcare: योगी आदित्यनाथ के विजन से उत्तर प्रदेश बना डिजिटल हेल्थ लीडर

Published : Jan 11, 2026, 08:24 PM IST
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सार

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में यूपी की स्वास्थ्य व्यवस्था एआई और डिजिटल तकनीक से सशक्त हो रही है। टेलीकंसल्टेशन, टीबी नियंत्रण, मातृ-शिशु स्वास्थ्य और गैर-संचारी रोगों में एआई से बेहतर, तेज और सुलभ सेवाएं मिल रही हैं।

लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की स्पष्ट नीति और दूरदर्शी सोच के चलते देश के सबसे अधिक आबादी वाले राज्य उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। करीब 24 करोड़ की जनसंख्या, विशाल ग्रामीण क्षेत्र और मातृ-शिशु स्वास्थ्य से लेकर गैर-संचारी रोगों तक की चुनौतियों के बीच प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था को तकनीक-सक्षम और भविष्य के अनुरूप बनाया जा रहा है।

स्वास्थ्य क्षेत्र में एआई बना सशक्त सहायक उपकरण

उत्तर प्रदेश में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) स्वास्थ्य सेवाओं में एक मजबूत सहायक उपकरण के रूप में उभर रहा है। एआई निर्णय लेने, रोग की पहचान और इलाज की गुणवत्ता को बेहतर बना रहा है। योगी सरकार ने यह साबित किया है कि मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति, बेहतर डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और फ्रंटलाइन वर्कर्स के समर्पण से एआई स्वास्थ्य सेवाओं को नई ऊंचाइयों तक ले जाया जा सकता है।

एआई आधारित स्वास्थ्य समाधानों के लिए यूपी सबसे सक्षम राज्य

अपर मुख्य सचिव (स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा) अमित कुमार घोष के अनुसार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का स्पष्ट विजन है कि तकनीक के माध्यम से आमजन तक बेहतर, सुलभ और समयबद्ध स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाई जाएं। पिछले पौने नौ वर्षों में स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने के साथ-साथ डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को प्राथमिकता दी गई है। इसी कारण आज उत्तर प्रदेश उन अग्रणी राज्यों में शामिल है, जहां एआई आधारित स्वास्थ्य समाधानों को जमीन पर उतारने की सबसे अधिक क्षमता मौजूद है।

10 लाख फ्रंटलाइन हेल्थ वर्कर्स और मजबूत डिजिटल प्लेटफॉर्म

प्रदेश में करीब 10 लाख फ्रंटलाइन हेल्थ वर्कर्स, जिनमें आशा, एएनएम, नर्स और डॉक्टर शामिल हैं, ग्रामीण से लेकर शहरी क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ बने हुए हैं। इनके काम को सरल और प्रभावी बनाने के लिए HMIS, RCH पोर्टल, निक्षय पोर्टल (टीबी नियंत्रण) और ई-संजीवनी जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म सक्रिय हैं। ये प्लेटफॉर्म अब केवल डाटा संग्रह तक सीमित नहीं हैं, बल्कि नीति निर्माण, निगरानी और त्वरित निर्णय में भी अहम भूमिका निभा रहे हैं।

टेलीकंसल्टेशन में यूपी देश में नंबर वन

अपर मुख्य सचिव ने बताया कि योगी सरकार ने डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर को स्वास्थ्य सुधार का मुख्य आधार बनाया है। ई-संजीवनी के जरिए टेलीमेडिसिन नेटवर्क का व्यापक विस्तार हुआ है। आज उत्तर प्रदेश देश में सबसे अधिक टेलीकंसल्टेशन देने वाला राज्य बन चुका है। यही नेटवर्क अब एआई आधारित क्लिनिकल निर्णय प्रणाली को अपनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

एआई आधारित क्लिनिकल डिसीजन सपोर्ट सिस्टम से बेहतर इलाज

वर्तमान में एआई आधारित क्लिनिकल डिसीजन सपोर्ट सिस्टम (CDSS) प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और टेलीमेडिसिन सेवाओं में डॉक्टरों को इलाज से जुड़े निर्णय लेने में मदद कर रहा है। यह सिस्टम मरीज के लक्षण, मेडिकल इतिहास और उपलब्ध डाटा के आधार पर इलाज के विकल्प सुझाता है। इससे इलाज की गुणवत्ता बेहतर हुई है और अधिक मरीजों वाले अस्पतालों में डॉक्टरों पर दबाव भी कम हुआ है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का मानना है कि एआई डॉक्टर की जगह नहीं ले सकता, बल्कि उसे और सक्षम बनाता है।

एआई से टीबी प्रभावित क्षेत्रों और मरीज समूहों की पहचान

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की महानिदेशक डॉ. पिंकी जोवल ने बताया कि प्रदेश में टीबी उन्मूलन योगी सरकार की शीर्ष प्राथमिकताओं में है। निक्षय पोर्टल के साथ एआई आधारित विश्लेषण टूल्स को जोड़कर उन क्षेत्रों और मरीज समूहों की पहचान की जा रही है, जहां जोखिम अधिक है। मैपिंग और प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली से संसाधनों की बेहतर योजना और समय रहते हस्तक्षेप संभव हो रहा है।

मातृ और शिशु स्वास्थ्य में भी एआई की अहम भूमिका

योगी सरकार की प्राथमिकताओं में मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी भी शामिल है। एआई आधारित उपकरण उच्च जोखिम वाली गर्भावस्थाओं की पहचान, समय पर रेफरल और नवजात देखभाल में मदद कर रहे हैं। फ्रंटलाइन वर्कर्स को डिजिटल संकेत मिलने से वे समय रहते जरूरी कदम उठा पा रही हैं।

गैर-संचारी रोगों की पहचान में एआई से मिल रही मदद

प्रदेश में डायबिटीज और उच्च रक्तचाप जैसे गैर-संचारी रोग तेजी से बढ़ रहे हैं। NFHS-5 के अनुसार देश में लगभग 6.5 प्रतिशत वयस्क मधुमेह से ग्रस्त हैं। उत्तर प्रदेश में एआई सामुदायिक स्तर पर स्क्रीनिंग और शुरुआती पहचान को मजबूत कर रहा है। डायबिटिक रेटिनोपैथी की पहचान के लिए रेटिनल इमेज विश्लेषण जैसे पायलट प्रोजेक्ट्स से स्क्रीनिंग और रेफरल सिस्टम अधिक प्रभावी हुआ है।

मानव-केंद्रित एआई मॉडल पर काम कर रही योगी सरकार

प्रदेश में अपनाया जा रहा एआई मॉडल पूरी तरह मानव-केंद्रित है। आशा, एएनएम, नर्स और डॉक्टरों के अनुभव को ध्यान में रखकर तकनीक विकसित की जा रही है। शुरुआती पायलट प्रोजेक्ट्स से यह स्पष्ट हुआ है कि जब एआई समाधान जमीनी जरूरतों के अनुरूप होते हैं, तो उन्हें आसानी से अपनाया जाता है। इससे शोध संस्थानों, तकनीकी कंपनियों और डोनर एजेंसियों के साथ सहयोग बढ़ रहा है।

यूपी को एआई हेल्थ मॉडल स्टेट बनाने की दिशा में प्रयास

योगी सरकार उत्तर प्रदेश को एआई आधारित स्वास्थ्य नवाचार का मॉडल स्टेट बनाने की दिशा में लगातार काम कर रही है। इसके तहत नैतिक और समावेशी एआई, बेहतर डाटा गुणवत्ता, एआई समाधानों के लिए स्पष्ट ढांचा और क्षमता निर्माण पर विशेष जोर दिया जा रहा है, ताकि अन्य राज्य भी इस मॉडल से सीख ले सकें।

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