Mirabai Chanu: पिज्जा खाकर जश्न मनाएंगी सोना जीतने वाली चानू, जानें कैसे गोल्डन गर्ल ने कमजोरी को हथियार बनाया

Published : Jul 31, 2022, 09:50 AM ISTUpdated : Jul 31, 2022, 11:05 AM IST
Mirabai Chanu: पिज्जा खाकर जश्न मनाएंगी सोना जीतने वाली चानू, जानें कैसे गोल्डन गर्ल ने कमजोरी को हथियार बनाया

सार

वेटलिफ्टर मीराबाई चानू ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2022 (Commonwealth Games 2022) में गोल्ड जीतकर इतिहास दर्ज किया है। मीराबाई चानू ने देश के करोड़ों लोगों को खुश होने का मौका दिया है। उन्होंने लाखों लड़कियों को कांफिडेंस दिया है कि लड़कियां कुछ भी कर सकती हैं। 

Mirabai Chanu. कॉमनवेल्थ गेम्स 2022 में वेटलिफ्टिंग में भारत ने कमाल का प्रदर्शन किया है। टीम की अगुवाई कर रहीं टोक्यो ओलंपिक स्टार मीराबाई चानू ने गोल्ड जीता है। जबकि वेटलिफ्टर बिंदियारानी ने सिल्वर, संकेत ने भी सिल्वर मेडल जीते हैं। गोल्ड जीतने वाली एथलीट मीराबाई चानू ने कहा कि उन्हें बहुत खुशी हो रही है। उन्होंने यह भी कहा कि मैं भारत पहुंचकर इस जीत का जश्न मनाना चाहती हूं।

पिज्जा खाना चाहती हैं चानू
गोल्ड जीतने की खुशी पर मीराबाई चानू अपना पसंदीदा पिज्जा खाना चाहती हैं। गोल्ड जीतने के बाद पूछे गए एक सवाल के जवाब में चानू ने मजाकिया अंदाज में कहा कि भले ही वजह थोड़ा बढ़ जाए, वे पिज्जा खाना पसंद करेंगी। मीराबाई चानू ने कहा कि सभी जानते थे कि कॉमनवेल्थ खेल मेरे लिए आसान नहीं लेकिन मैंने अपना 100 फीसदी प्रयास दिया है। मैं स्नैच में कमजोर थी लेकिन तय कर लिया था कि इसी में बेहतर करूंगी। टोक्यो से आने के बाद में मैंने इसमें काफी सुधार करने की कोशिश की। कॉमनवेल्थ गेम्स की तैयारी में मैंने कोई कसर नहीं छोड़ी।


बड़े टूर्नामेंट की बड़ी खिलाड़ी

  • 2014 कॉमनवेल्थ गेम्स में सिल्वर मेडल
  • 2018 के कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल
  • 2022 के कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल
  • 2017 के वर्ल्ड चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल
  • 2021 के टोक्यो ओलंपिक  में सिल्वर मेडल

कौन हैं मीराबाई चानू
मीराबाई चानू बेहद गरीब परिवार से ताल्लुक रखती हैं। इतने गरीब परिवार से कि वे जंगल से लकड़ियां बीनकर जीवन यापन करते थे। चानू भी अपने भाई बहनों के साथ लड़कियां उठाती थीं, बचपन से ही उन्हें वजह उठाने की आदत रही है। एक बार जो गठ्ठर मीराबाई के भाई नहीं उठा पाए, उसी को मीराबाई ने आसानी से उठा लिया। तब उनकी उम्र मात्र 12 साल की थी। धीरे-धीरे चानू ने वेटलिफ्टिंग के बारे में सोचना शुरू किया और तमाम दिक्कतें होने के बावजूद परिवार से चानू का सपोर्ट किया। उनकी मां ने बेटी के सपनों को पूरा करने के लिए गरीबी में हार नहीं मानी। आज मीराबाई चानू पर पूरा देश गर्व कर रहा है लेकिन जिन परिस्थितियों से निकलकर चानू ने यह उपलब्धि हासिल की है, वह लाखों के लिए प्रेरणास्रोत है।

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