
नई दिल्ली : केंद्र सरकार की तरफ से कृषि कानूनों (Agriculture Bill) को वापस लेने की घोषणा के बाद भी किसान आंदोलन जारी रखने पर अड़े हुए हैं। आगे की रणनीति तय करने संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) की आज बैठक होगी। यह बैठक सुबह 11 बजे सिंघु बॉर्डर पर शुरू होगी। इससे पहले शनिवार को संयुक्त किसान मोर्चा के प्रमुख नेताओं की 9 सदस्यीय कमिटी और पंजाब (Punjab) के 32 किसान संगठनों की बैठक हुई थी। किसान आंदोलन की अगुवाई कर रहे संयुक्त किसान मोर्चा ने स्पष्ट किया है कि कानून वापस लिए जाने के बावजूद उनका आंदोलन जारी रहेगा। 22 नवंबर को यूपी के लखनऊ (lucknow) में महापंचायत भी बुला ली गई है। इसमें सभी किसान नेता शामिल होंगे।
29 नवंबर से संसद कूच
संयुक्त किसान मोर्चा ने साफ-साफ कहा कि जो भी कार्यक्रम पहले से तय हैं, किसान मोर्चा उसी पर आगे बढ़ेगा। 29 नवंबर से 500-500 किसानों के जत्थे ट्रैक्टरों पर संसद की तरफ कूच करेंगे। कहा गया है कि किसान नेताओं की तैयारियां जारी हैं और मोर्चा के सभी पूर्व घोषित कार्यक्रम जारी रहेंगे। किसान मोर्चे का कहना है कि अगर केंद्र सरकार ने किसानों की बाकी मांगें भी नहीं मानी तो भाजपा (BJP) की घेराबंदी की जाएगी।
किसानों की मुख्य मांगें
MSP पर कानून
बिजली पर अध्यादेश की वापसी
पराली के मुक़दमों की वापसी
किसान आंदोलन के मुक़दमों की वापसी
आंदोलन में शहीद किसानों के परिवारों को मुआवजा
शनिवार को बनी रणनीति
शनिवार दोपहर सिंघु बॉर्डर पर पंजाब के 32 किसान संगठनों की अहम बैठक हुई। बैठक में फैसला लिया गया कि सभी किसान संयुक्त किसान मोर्चा के साथ हैं। MSP समेत दूसरी मांगें पूरी कराने के लिए आंदोलन को आगे कैसे बढ़ाया जाना है, इसकी पूरी रणनीति रविवार यानी आज होने वाली संयुक्त किसान मोर्चा की मीटिंग में बनाई जाएगी और इसमें पंजाब की 32 किसान यूनियन के नेता भी शामिल हो रहे हैं।
जारी रहेगा आंदोलन
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra modi) की तरफ से कृषि कानूनों को रद्द करने का ऐलान किया गया है। मगर किसान नेताओं का कहना है कि इसके साथ उनकी दो और मांगें थीं। MSP को कानून के रूप में लेकर आना और बिजली संशोधन एक्ट को रद्द करना। जब तक उनकी यह दोनों मांगें नहीं मानी जाएंगी, वे तब तक अपना संघर्ष जारी रखेंगे। किसान नेताओं ने तो यहां तक कहा है कि उन्हें प्रधानमंत्री पर यकीन नहीं है, इसलिए जब तक संसद में यह बिल रद्द नहीं कर दिए जाते, तब तक वह दिल्ली (delhi) के बॉर्डर से हटेंगे नहीं।
एक साल से बॉर्डर पर डटे हैं किसान
बता दें कि कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों का संघर्ष 14 महीने से चल रहा है। किसान एक साल से दिल्ली के बॉर्डर पर बैठे हुए हैं। अब जब उत्तर प्रदेश (Uttar pradesh) और पंजाब में विधानसभा चुनाव हैं तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तरफ से बड़ा फैसला लिया गया है। इसके बावजूद भी किसान यहां से हटने को तैयार नहीं हैं। अब सभी की नजर किसानों की अगली रणनीति पर है।
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