सभ्यताओं के संरक्षण के लिए सांस्कृतिक विरासतों का संरक्षण जरूरी: डॉ तरुण विजय

Published : Sep 28, 2021, 06:55 PM IST
सभ्यताओं के संरक्षण के लिए सांस्कृतिक विरासतों का संरक्षण जरूरी: डॉ तरुण विजय

सार

डॉ तरुण विजय ने कहा कि भारतीय संस्कृति और इतिहास को ब्रिटिश शासन के द्वारा इतिहास में कमतर करके प्रस्तुत किया गया क्योंकि वे जानते थे कि भारतीय संस्कृति को खत्म किए बिना भारत पर लंबे समय तक शासन नहीं किया जा सकता है।


देहरादून. दून विश्वविद्यालय में आजादी के 75 में अमृत महोत्सव के अंतर्गत पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती समारोह का आयोजन किया गया। जिसकी थीम "उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत" थी।  इस कार्यक्रम के मुख्य वक्ता डॉ तरुण विजय, पूर्व सांसद एवं वर्तमान में अध्यक्ष, राष्ट्रीय स्मारक प्राधिकरण ने कहा कि भारतीय संस्कृति और इतिहास को ब्रिटिश शासन के द्वारा इतिहास में कमतर करके प्रस्तुत किया गया क्योंकि वे जानते थे कि भारतीय संस्कृति को खत्म किए बिना भारत पर लंबे समय तक शासन नहीं किया जा सकता है।

इसे भी पढ़ें- दिव्यांग बच्चों पर ऐतिहासिक सम्मेलन: तरुण विजय ने कहा- ससंद या विधानसभा में इनके लिए नहीं होती चर्चा

परिणाम स्वरूप, भारत के वास्तविक ऐतिहासिक तथ्यों एवं महापुरुषों के बारे में सही जानकारी नई पीढ़ी तक नहीं पहुंच पाई। उन्होंने कहा कि किसी भी सभ्यता के संरक्षण के लिए सांस्कृतिक विरासतों का संरक्षण जरूरी है। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में सांस्कृतिक विरासतों के संरक्षण का कार्य प्राथमिकता के साथ किया जा रहा है। प्रधानमंत्री जी को हाल ही में इनकी अमेरिका की यात्रा के दौरान उन्हें भारत से संबंधित सांस्कृतिक विरासत से संबंधित कलाकृतियों एवं वस्तुओं को सौंपा गया। डॉ तरुण विजय ने अपने वक्तव्य में कहा कि उत्तराखंड के बहुत से क्षेत्र सांस्कृतिक विरासत के तौर पर अग्रणी है। 

इसे भी पढ़ें- Tokyo Olympics में क्वालिफाई करने वालीं पहली भारतीय फेंसर भवानी देवी की तलवार भी अब ई-नीलामी में पहुंची

जैसे कि चकराता, गढ़ी कैंट, बद्रीनाथ, केदारनाथ, आदिबद्री, कटारमल, द्वाराहाट और जागेश्वर. इन स्मारकों का रखरखाव अत्यंत जरूरी है क्योंकि यह आने वाली पीढ़ी के लिए प्रेरणा स्रोत होते हैं, इसके संरक्षण के लिए लोगों के बीच भी जन जागरण  किया जाना भी आवश्यक है। दून विश्वविद्यालय की कुलपति प्रोफेसर सुरेखा डंगवाल ने अपने  विचारों को रखते हुए कहा कि  भारतीय संस्कृति ही हमारी वास्तविक विरासत है। भारत सदैव से ही अपनी महान परंपराओं के लिए प्रसिद्ध रहा है। 

उन्होंने कहा- इन परंपराओं को सही ढंग से वैश्विक पटल पर लाना हमारा उद्देश्य होना चाहिए। सांस्कृतिक स्मारकों का संरक्षण, आने वाली पीढ़ी के लिए प्रेरणा का काम करता है। भारतीय संस्कृति की पुनर्स्थापना से भारत एक बार पुनः विश्व गुरु बनेगा और न केवल हमारा समाज बल्कि संपूर्ण विश्व, हमारे पूर्वजों के द्वारा किए गए कार्यों पर गौरवान्वित महसूस करेंगे। संस्कृति के संरक्षण के लिए, दून विश्वविद्यालय विभिन्न शोध और शिक्षण गतिविधियों का सदैव से ही संचालन करता रहा है साथ ही इसमें और अधिक तेजी लाई जाएगी। 

PREV

Other Indian State News (अन्य राज्य समाचार) - Read Latest State Hindi News (अन्य राज्य की खबरें), Regional News, Local News headlines in Hindi from all over the India.

Recommended Stories

दो गांव, एक पैटर्न: पहले 300, अब मार दिए गए 100 कुत्ते? जांच में चौंकाने वाले संकेत
दोस्ती, गुस्सा और कत्ल: गोवा में रूसी नागरिक ने क्यों काटा दो महिलाओं का गला?