
कांगड़ा, हिमाचल प्रदेश. जनता कर्फ्यू के दौरान लोगों ने घरों में रहकर जो समझदारी दिखाई..एकजुटता दिखाई वो एक मिसाल बनी। लेकिन कहीं-कहीं, यह दिक्कतों का कारण भी बनी। यह दम्पती भी जनता कर्फ्यू का पालन करना चाहता था, लेकिन जब उसे हॉस्पिटल से निकाला गया, तो वो दु:खी हो गया। ऐसे में एक होटल वाला फरिश्ता बनकर सामने आया। उसने दम्पती और उसके परिजनों मुफ्त मे रहने का ठीया दिया और खाना भी खिलाया।
एक दिन बाद डिस्चार्ज चाहता था
हुआ यूं कि चंबा जिले में जम्मू-कश्मीर की सीमा से सटी तहसील चुराह के गांव आइल की रहने वाली खेलको देवी के पेट में तेज दर्द हो रहा था। पति उसे पीठ पर लादकर 17 मार्च को तीस्ता हॉस्पिटल लाया था। वहां से 18 मार्च को उसे चंबा रेफर कर दिया गया। यहां से 21 मार्च की सुबह कांगड़ा जिले के गग्गल स्थित टांडा मेडिकल कॉलेज में रेफर किया गया था। महिला के परिजनों ने बताया कि 22 मार्च को उसे हॉस्पिटल से डिस्चार्ज कर दिया गया। वे चाहते थे कि एक दिन उसे हॉस्पिटल में और रखा जाए। वे जनता कर्फ्यू का पालन करना चाहते थे। अगर महिला की तबीयत ज्यादा खराब न होती, तो वे घर से ही नहीं निकलते। परिजनों ने डॉक्टरों से विनती की, लेकिन वे नहीं मानें।
पुलिस और होटल मालिक आया मदद को
हॉस्पिटल से निकले दम्पती के साथ उनके एक परिजन और थे। यानी तीनों लोग आंखों में आंसू लिए हॉस्पिटल से निकले। उन्हें कुछ समझ नहीं आ रहा था कि कहां जाएं? ऐसे में पुलिस थाना गग्गल के हेड कांस्टेबल रणजीत सिंह और कुलजीत ने दम्पती की मदद की। उन्हें गांव इच्छी के एक होटल में ठहराने का इंतजाम किया। होटलवाले ने भी दम्पती से कोई पैसा नहीं लिया। उन्हें खाना भी खिलाया। इस बारे में टांडा मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल भानु अवस्थी ने कहा कि वे इस मामले की जांच कराएंगे।
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