
पुरी (ओडिसा).अक्सर देखा जाता है कि हमारे देश में जब किसी की मौत हो जाती है तो उसकी अर्थी को पुरुष ही कंधा देते हैं। लेकिन ओडिसा के पुरी से एक दिल को छू लेने वाली तस्वीर सामने आई है। जहां बेटियों ने बेटों का फर्ज निभाया। यहां मां की मौत पर बेटियों ने अर्थी को कंधा देकर साबित कर दिया कि परिवार में उनकी अहमियत किसी बेटे से कम नहीं है।
मां की अर्थी 4 किमी. दूर श्मशान तक लेकर गईं बेटियां
दरअसल, यह मामला पुरी के मंगलाघाट का है, जहां रविवार को यहां की रहने वाली 80 साल की जाति नायक का निधन हो गया था। उसके परिवार में 2 बेटे और 4 बेटिया हैं। लेकिन काफी इंतजार के बाद भी जब बेटे नहीं पहुंचे तो बेटियों ने बेटा बनकर मां के पार्थिव शरीर को श्मशान घाट तक ले जाने का फैसला किया। चारों बेटियों ने पहले पड़ोसियों की मदद से अर्थी बनाई और उसे लेकर 4 किलोमीटर दूर श्मशान पहुंचीं।
बेटियों का फर्ज देख हर किसी ने किया सैल्यूट
बता दें कि जैसे ही यह अर्थी इलाके से निकली तो हर किसी ने इन बेटियों के फैसले और उनके जज्बे की तारीफ की। इतना ही नहीं उन्होंने यह भी कहा कि हमारे देश की महिलाएं पुरुषों से पीछे नहीं हैं। इसके बाद उन्होंने अपने पड़ोसियों की मदद से पूरी विधि-विधान से अंतिम संस्कार तक कर दिया। बेटे की तरह क्रियाक्रम सारी प्रथाएं निभाईं।
मां ने ठेला लगाकर बेटों को पाला..फिर भी आखिरी बार नहीं आए
पड़ोसियों ने बताया कि मां की मौत होने पर भी उसके दोनों बेटे नहीं आए। जबकि मां ने उनको पिता की मौत के बाद सड़क पर ठेला लगाकर उन्हें पाला था। खुद भूखी रहकर उनको खिलाया और उनकी हर इच्छा पूरी की। लेकिन आज जब उसकी मौत हो गई तो वही बेटे उसका आखिरी बार चेहरा देखने तक नहीं आए।
बेटों ने 10 सालों में एक बार भी नहीं जाना हाल
वहीं मृतका की बेटी सीतामणि ने कहा कि हमारे भाईयों ने मां को अकेला छोड़ दिया था। पिछले 10 साल से उनका कोई ध्यान नहीं रखा। उन्होंने एक बार भी मां के बारे में नहीं पूछा कि वो जिंदा है या मर गई। हम बहनों की शादी हो चुकी है, लेकिन मां अकेले ही अपना ध्यान रख रही थी। कुछ दिन पहले वह बीमार हो गई थी। तब हम लोग उनको देखने आए और उनको भर्ती कराया। लेकिन भाई फिर भी नहीं आए।
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