
भोपाल: सुषमा स्वराज मध्य प्रदेश के एक ऐसी राजनेता रही हैं, जिन्होंने प्रदेश को एक नई दिशा दी। पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज 2009 और 2014 दो बार विदिशा से सांसद रहीं। उन्हें मध्य प्रदेश लाने का श्रेय शिवराज सिंह चौहान को जाता है। उन्होंने ही बदलते राजनीतिक परिदृश्य को देखते हुए लालकृष्ण आडवाणी से सुषमा स्वराज का मध्य प्रदेश भेजने का आग्रह किया था। तब शिवराज मप्र के मुख्यमंत्री थे। हालांकि सुषमा स्वराज पहले भोपाल से चुनाव लड़ने की इच्छुक थीं, पर तत्कालिक परिस्थितियों को देखते हुए उन्होंने विदिशा से चुनाव लड़ना मंजूर किया। सुषमा के खिलाफ दिग्विजय सिंह के भाई लक्ष्मण सिंह मैदान में खड़े हुए थे।
2008 में भोपाल में जमाया था डेरा
2009 में विदिशा से सांसद का इलेक्शन लड़ने से ठीक एक साल पहले सुषमा स्वराज ने भोपाल में अपना डेरा डाल लिया था। उन्हें प्रोफेसर कॉलोनी में बंगला अलॉट किया गया था। पार्टी के नेताओं के मुताबिक, सुषमा को पांझ गांव से 90 प्रतिशत वोट मिले थे। चुनाव जीतने के बाद जब वे गांव पहुंचीं, तो लोगों का प्रेम-भाव देखकर भावुक हो उठी थीं। गांववालों ने उन्हें चांदी का मुकुट पहनाया था। इस पर सुषमा ने इस गांव को मुकुटमणि का खिताब दे डाला था। सुषमा ने इस गांव को गोद लिया था। विदिशा के लोग सुषमा को दीदी कहकर पुकारते थे। सुषमा भी रक्षाबंधन पर लोगों से राखी बंधवान नहीं भूलती थीं। शिवराज सिंह ने ट़्वीट किया- हमारी सुषमा दीदी सभी को छोड़कर चली गईं।
भोपाल में एम्स उनका सपना था..
भोपाल के पूर्व सांसद आलोक संजर बताते हैं कि भोपाल में एम्स खुलवाना सुषमा स्वराज का सपना था। 2004 में तत्कालीन अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में हेल्थ मिनिस्टर रहते हुए सुषमा स्वराज ने भोपाल में एम्स की नींव रखी थी।
दिल का दौरा पड़ने से हुआ निधन
सुषमा स्वराज का मंगलवार देर रात निधन हो गया। वे 67 साल की थीं। उनका जन्म 14 फरवरी 1952 को अंबाला में हुआ था। उन्हें दिल का दौरा पड़ने के बाद एम्स में भर्ती कराया गया था। निधन से कुछ वक्त पहले उन्होंने धारा 370 को लेकर ट्वीट कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बधाई दी थी।
दिल्ली की पहली महिला मुख्यमंत्री थीं सुषमा
सुषमा ने सबसे पहला चुनाव 1977 में लड़ा। तब वे 25 साल की थीं। वे हरियाणा की अंबाला सीट से चुनाव जीतकर देश की सबसे युवा विधायक बनीं। वे हरियाणा सरकार में मंत्री भी बनीं। इस तरह वे किसी राज्य की सबसे युवा मंत्री रहीं। अटलजी की सरकार में उन्हें मंत्री बनाया गया। 1998 में उन्होंने कैबिनेट से इस्तीफा दे दिया और दिल्ली की पहली महिला मुख्यमंत्री बनीं। हालांकि, इसके बाद हुए दिल्ली विधानसभा चुनाव में भाजपा हार गई। पार्टी की हार के बाद सुषमा ने विधानसभा की सदस्यता छोड़ दी और राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय हो गईं।
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