
अहमदाबाद, गुजरात के मोरबी में रविवार शाम 7 बजे दिल दहला देने वाला हादसा हो गया। जहां मच्छु नदी के ऊपर बना 140 साल पुराना केबल पुल ताश के पत्तों की तरह नदी में जा गिरा। इस दर्दनाक हदासे में अभी तक 141 लोगों की मौत हो गई है। वहीं पिछले 15 घंटों से शवों को खोजने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन चल रहा है। यह घटना इतनी भयावह है कि कई मंत्री-विधायक और सांसद अभी मौके पर मौजूद हैं। हादसे के इस मंजर ने हर किसी को हिलाकर रख दिया है। ये हादसा कितना भयावह है इस बात को सिर्फ वो ही लोग बता सकते हैं जो घटना के समय वहां मौजूद थे। तो आइए सुनते हैं चश्मदीदों की जुबानी हादसे की कहानी...
मैंने अपनी पूरी जिंदगी में ऐसा भयानक हादसा नहीं देखा...
दरअसल, काल बने इस ब्रिज ने कई परिवारों को उजाड़कर रख दिया है। यह हादसा इतना भयानक था कि किसी ने अपनी पूरी फैमिली को खो दिया है। किसी की मां तो किसी के पिता की मौत हो गई, तो वहीं किसी के मासूम बच्चे 15 घंटे होने के बाद भी नहीं मिले हैं। नदी किनारे कई महिलाएं अपने मासूमों के इंताजर में बिलख रही हैं। तो कई पिता के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। इन्हीं में से एक हैं मौके पर मौजूद महिला हसीना जो हादसे का मंजर बयां करते बिलख पड़ीं। हसीना ने बताया मैंने अपनी पूरी जिंदगी में ऐसा भयानक हादसा नहीं देखा। हर तरफ लोग चीख रहे थे। वहीं लोग उनकी मदद के लिए नदी में छलांग लगा रहे थे। मैंने और मेरे परिवार ने भी लोगों को नदी से निकालने में मदद की। इतना ही नहीं लोग बार निकले ते हमने अपना वाहन लोगों को अस्पताल पहुंचाने के लिए दिया। देखते ही देखते सब कुछ 15 मिनट के अंदर तबाह हो गया।
कई के अभी आंसू थमने के नाम नहीं ले रहे
वहीं दूसरी चश्मदीद महिला ने कहा-मेरी बहन मोरबी पुल घूमने आईं मोना मोवार की 11 साल की बेटी की मौत हो गई। उसके पति और छोटे बेटे की हालत गंभीर है, उनका अस्पताल में इलाज चल रहा है। मेरी बहन का तभी से बिलख रही है, उसके आंसू रुकने का नाम नहीं ले रहे हैं। क्योंकि बेटी रही नहीं और पति-बेटा जिंदगी की जंग लड़ रहे हैं। महिला ने कहा-हमारे जैसे पता नहीं और कितनी महिलाएं हैं जिनके तो सुहाग ही उजड़ गए।
1880 में बनकर तैयार हुआ था ये ऐतिहासिक ब्रिज
मोरबी का यह केवल ब्रिज 140 साल पुराना है। इस सस्पेंशन ब्रिज की लंबाई करीब 765 फीट है। यह ब्रिज गुजरात के मोरबी ही नहीं बल्कि पूरे देश के लिए ऐतिहासिक धरोहर है। इस ब्रिज का उद्घाटन 20 फरवरी 1879 को मुंबई के गवर्नर रिचर्ड टेम्पल ने किया था। उस दौरान इसकी लगात करीब साढ़े तीन लाख के करीब थी। जो 1880 में बनकर तैयार हुआ था। इसके लिए सामान भी इग्लैंड से मंगवाया गया था।
8 PHOTOS में देखें मोरबी हादसे का डरावना मंजर, किसी ने तैर कर बचाई जान तो कोई टूटे पुल पर फंसा रहा
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