
तिरुवनंतपुरम. केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने पुलिस कार्रवाई में चार नक्सलियों के मारे जाने की घटना का बचाव करते हुए कहा कि माओवादी कोई ‘‘पवित्र आत्मा’’ और ‘‘मेमने’’ तो हैं नहीं। छत्तीसगढ और बिहार जैसे राज्यों में माओवादियों द्वारा सुरक्षाकर्मियों और किसानों की हत्या किये जाने का हवाला देते हुए उन्होंने जानना चाहा कि क्या विपक्षी संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा यूडीएफ केरल में भी ऐसी ही स्थिति चाहता है।
दिया गया था स्थगन प्रस्ताव
माओवादियों की हत्या और माकपा के माओवादी समर्थक छात्र कार्यकर्ताओं की गैर कानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम के तहत गिरफ्तारी पर राज्य विधानसभा में चर्चा के लिए कांग्रेस द्वारा दिये गये स्थगन प्रस्ताव के नोटिस का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) सरकार इस कानून का दुरूपयोग नहीं होने देगी। उन्होंने पिछले हफ्ते पलक्कड़ जिले के अट्टापड्डी में हुए पुलिस मुठभेड़ का जिक्र करते हुए कहा, ‘‘ माओवादी आत्मसमर्पण करने तो आये नहीं थे। उन्होंने पुलिस पर गोलियां चलायी थीं।’’
मारे गए थे चार माओवादी
इस पुलिस मुठभेड़ में चार माओवादी मारे गये थे। विजयन ने यूडीएफ पर माओवादियों का ‘महिमामंडन’ करने का आरोप लगाते हुए कहा कि यह स्तब्ध कर देने वाली बात है। माओवादी समर्थक पर्चों का कथित तौर पर वितरण करने को लेकर गिरफ्तार किये गये और यूएपीए के तहत आरोपी बनाये गये दो छात्र कार्यकर्ताओं के मामले को लेकर विजयन के इस्तीफे की मांग करने के एक दिन बाद विपक्षी मोर्चा ने विधानसभा में स्थगन प्रस्ताव देकर दबाव बढ़ाने का प्रयास किया।
पवित्र आत्मा की तरह किया जा रहा पेश
इसका विरोध करते हुए विजयन ने कहा, ‘‘ इन चरमपंथियों ने छत्तीसगढ़, ओडिशा और बिहार समेत कई राज्यों में कई सीआरपीएफ कर्मियों, पुलिसकर्मियों और किसानों की हत्या की है और माओवादियों को यूडीएफ ‘‘पवित्र आत्मा’’ की तरह पेश कर रहा है। क्या आप केरल में यही स्थिति चाहते हैं?’’
(यह खबर समाचार एजेंसी भाषा की है, एशियानेट हिंदी टीम ने सिर्फ हेडलाइन में बदलाव किया है।)
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