
अलफुजा। केरल के अल्फुजा जिले में रहने वाली 11वीं की छात्रा सांद्रा बाबु ने जैसी ही सुना कि उसके बचे हुए पेपर होने वाले हैं, वह परेशान हो गई। क्योंकि केरोना के कारण उसके पेपर बीच में पोस्टपोन्ड हो गए थे। वह अपने रिश्तेदार के यहां रह रही थी। उसका स्कूल उसके घर से दूसरे जिले कोयट्टम में है। छात्रा को अपने घर से स्कूल जाने के लिए बोट का सहारा लेना पड़ता है।
लॉकडाउन लगे होने के कारण स्कूल तक चलने वाली सभी नाव बंद हैं। इस बात की जानकारी जैसे ही स्टेट वाटर ट्रांसपोर्ट विभाग को मिली तो, प्रशासन ने 70 सीटों की नाव छात्रा को स्कूल पहुंचाने के लिए भेज दी। सांद्रा के दो पेपर बचे हुए थे जो 29 और 30 को थे। प्रशासन ने दोनों दिन 70 सीटों की बोट में अकेले ले जाकर परीक्षा दिलाई। प्रशासन की इस मदद की सभी ने तारीफ की है।
अपने रिश्तेदारों के यहां रहती थी छात्रा
सांद्रा एसएनडीपी स्कूल में पढ़ती है। वह अलफुजा जिले के एमएन ब्लॉक में रहती है। उसका स्कूल कोयट्टम जिले के कांजीराम गांव में हैं। यहां एक जगह से दूसरी जगह जाने के लिए बोट का सहारा लेना पड़ता है। यहां बोट सर्विस लकडाउन के कारण बंद थी। केरला के स्टेट वाटर ट्रांसपोर्ट विभाग को जैसे ही इसकी जानकारी मिली तो अधिकारियों ने छात्रा की परीक्षा के लिए 70 सीटों की बोट भेज दी। सांद्रा ने कहा, कि जैसे ही वाटर ट्रांसपोर्ट विभाग ने मुझे बाताया कि मुझे परीक्षा देने के लिए बोट मिल जाएगी, तो मैं बहुत खुश हुई। बोट चालक ने मुझसे यह भी पूछा, कि कहीं मैंने कोई पेपर मिस तो नहीं किया। वाटर ट्रांसपोर्ट विभाग की वजह से ही मैं परीक्षा दे पाई हूं।
-परीक्षा के आगे खर्चा महत्वपूर्ण नहीं...
केरल स्टेट वाटर ट्रांसपोर्ट के डायरेक्टर शाजी वी नायर ने कहा, कि जैसे ही हमें छात्रा की परीक्षा के बारे में पता चला तो हमने तुरंत बोट का इंतेजाम किया। शाजी ने कहा हमें बोट को रुटीन रूट से भी दूर ले जाना पड़ा, लेकिन परीक्षा के सामने खर्चा मायने नहीं रखता। छात्रा के लिए अलग रूट के लिए हमें अनुमति लेनी पड़ी, लेकिन छात्रा ने परीक्षा दे दी।
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