
कुल्लू, हिमाचल प्रदेश. रविवार को यहां पल्स पोलिया अभियान के तहत दुर्गम बर्फीले पहाड़ी इलाके में बच्चों को दवा पिलाने निकली एक आंगनबाड़ी कार्यकर्ता की खाई में गिरकर मौत हो गई। इन दिनों यहां बर्फबारी हो रही है। पहाड़ों पर कई फीट तक बर्फ जमी है। ऐसे में भी अभियान को आगे नहीं बढ़ाने पर प्रशासन पर सवाल खड़े होने लगे हैं। जिस गांव में इस कार्यकर्ता की ड्यूटी लगाई गई थी, वो 25 किमी दूर है। पहाड़ों पर बर्फ होने से यहां तक पैदल ही पहुंचा जा सकता है। वो भी यहां तक पहुंचने में करीब 10 घंटे लगते हैं। इस कार्यकर्ता की शकटि मरौड इलाके में ड्यूटी लगाई गई थी। वो खुशी-खुशी अपने पति को लेकर गांव के लिए निकली थी। तभी रास्ते में बर्फ में पैर फिसलने पर वो 300 फीट नीचे खाई में जा गिरी। हादसा करीब 10 बजे हुआ।
पति की आंखों के सामने तड़प-तड़पकर मर गई पत्नी
जिला महिला एवं बाल विकास परियोजना अधिकारी वीरेंद्र सिंह आर्य ने बताया कि कार्यकर्ता गीता देवी (35) मिनी आंगनबाड़ी केन्द्र शकटि मरौड का अतिरिक्त कार्यभार संभाल रही थीं। वे रविवार को पति भागचंद को लेकर ड्यूटी परी निकली थीं। गीता देवी मैल गांव की रहने वाली थीं। इस मामले में प्रशासन की लापरवाही सामने आ रही है। इन दिनों कुल्लू जिले के कई इलाके ऐसे हैं, जहां बर्फबारी के चलते पहुंच पाना आसान नहीं है। बरहाल, महिला के परिजनों को 50 हजार रुपए का मुआवजा दिया गया है। वहीं एसपी कुल्लू गौरव सिंह ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं।
इस मामले में प्रशासन की सीधी लापरवाही सामने आ रही है। प्रदेश में भारी बर्फबारी के चलते लाहौल, किन्नौर और चंबा जिले के दुर्गम इलाके पांगी में पोलियो मुक्त दवा बाद में पिलाने की व्यवस्था की गई थी, लेकिन कुल्लू की इस दुर्गम पंचायत के गांव को नजरअंदाज किया गया। कुल्लू जिले में भी कई ऐसे दुर्गम इलाके हैं जहां आजकल भारी बर्फबारी के चलते पहुंचना मुमकिन नहीं है।
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