अब केंद्र शासित प्रदेश बन चुके लद्धाख का क्या रहा है इतिहास, जानें इससे जुड़े विवाद

Published : Aug 16, 2019, 02:08 PM ISTUpdated : Aug 16, 2019, 02:33 PM IST
अब केंद्र शासित प्रदेश बन चुके लद्धाख का क्या रहा है इतिहास, जानें इससे जुड़े विवाद

सार

जम्मू-कश्मीर राज्य का हिस्सा रहा लद्दाख संविधान की धारा 370 के खत्म कर दिए जाने के बाद केंद्र शासित राज्य बन गया है। लद्दाख के इतिहास और वहां की संस्कृति के बारे में बाहर के लोगों को जानकारी कम ही रही है।

नई दिल्ली। धारा 370 की समाप्ति के बाद जम्मू-कश्मीर का हिस्सा रहा लद्दाख केंद्र शासित राज्य बन गया। यह एक ऐसा क्षेत्र रहा है, जिसके इतिहास और संस्कृति के बारे में लोगों को कम ही पता है। लद्धाख के ज्यादातर लोग बौद्ध धर्म मानने वाले  हैं। यह क्षेत्र हिमालय और काराकोरम पर्वत श्रृंखला के बीच है। लद्दाख के  की संस्कृति क्या रही, यह भारत का हिस्सा कैसे बना, चीन इस पर अपना दावा क्यों करता है, जानते हैं इसके बारे में। 

क्या है इतिहास
लद्दाख का इतिहास दो हजार से भी अधिक पुराना बताया जाता है। इसके प्राचीन इतिहास को छोड़ दिया जाए तो कहा जा सकता है कि 17वीं सदी के अंत में जब लद्दाख का तिब्बत से विवाद हुआ तो यह भूटान से जुड़ गया। यह भूटान का ही अंग बना रहा। 19वीं सदी में कश्मीर के डोगरा शासकों ने इसे अपने राज्य में मिला लिया। इसके बाद भी तिब्बत, भूटान, चीन, बाल्टिस्तान और कश्मीर के साथ इसका विवाद जारी रहा। साल 1834 में महाराजा रणजीत सिंह के एक सैन्य अधिकारी ने लद्धाख पर हमला कर उसे जीत लिया और यह कश्मीर में मिला लिया गया। 1842 में लद्दाख में कश्मीर के प्रभुत्व के खिलाफ एक विद्रोह हुआ, जिसे कुचल दिया गया। इसके बाद लद्दाख स्थाई रूप से जम्मू-कश्मीर राज्य का हिस्सा बन गया।

ब्रिटेन की बढ़ी दिलचस्पी
साल 1850 के बाद लद्दाख में ब्रिटिश शासकों की दिलचस्पी बढ़ी। 1885 में लेह को मोरावियन चर्च के मिशन का हेडक्वार्टर बना दिया गया। अंग्रेजों ने इसे जम्मू-कश्मीर राज्य के अंग के रूप में स्वीकार कर लिया था। 

बना भारत का अंग
भारत को आजादी मिलने के बाद कश्मीर के शासक महाराजा हरि सिंह ने भारत में  राज्य के विलय से इनकार कर दिया था, पर जब 1948 में पाकिस्तानी हमलावरों ने घुसपैठ की तो हरि सिंह के सामने भारत में विलय के सिवा दूसरा कोई विकल्प नहीं बचा था। भारतीय सेना के हस्तक्षेप के बाद पाकिस्तानी हमलावरों को खदेड़ा गया और जम्मू-कश्मीर के भारत में विलय के साथ लद्दाख भी भारत का अंग बन गया। 

चीन से विवाद 
1950 के आसपास चीन की घुसपैठ से तिब्बत परेशान हो गया था। 1962 में चीन ने अक्साई चिन इलाके पर कब्जा कर लिया। इसके बाद चीन ने झिनझियांग और तिब्बत के बीच सड़कें भी बनवानी शुरू कर  दी।  चीन ने पाकिस्तान के साथ मिल कर काराकोरम हाईवे बनवाया। इसके बाद भारत ने श्रीनगर से लेह के बीच हाईवे बनवाया। इससे लेह तक पहुंचना बहुत आसान हो गया। जम्मू-कश्मीर के साथ ही लद्दाख को लेकर भारत का पाकिस्तान और चीन से लगातार विवाद जारी रहा। लद्धाख का कारगिल क्षेत्र 1947, 1965, 1971 और 1999 में होने वाले युद्दों का केंद्र रहा। 1979 में लद्दाख को दो जिलों - कारगिल और लेह में बांट दिया गया। 1989 में यहां बौद्ध और मुस्लिम समुदाय के बीच विवाद भी हुआ जो बाद में दंगे में बदल गया। उसी समय लद्दाख ने जम्मू-कश्मीर से अलग होने और केंद्र शासित राज्या का दर्जा दिए जाने की मांग की थी। साल 1993 में लद्दाख स्वायत्त हिल स्टेट डेवलपमेंट परिषद् की स्थापना की। लद्धाख की सीमा को लेकर भारत का चीन से विवाद हमेशा बना रहता है। यह विवाद 1962 के युद्ध से ही चल रहा है और इसका कोई समाधान अभी नहीं हुआ है।  

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