राजस्थान की इस 18 साल की बेटी ने एक संकल्प के लिए सब त्याग दिया, दूल्हा-दुल्हन बनकर यूं मनाया अंतिम बर्थडे

Published : Apr 06, 2022, 06:16 PM IST
राजस्थान की इस 18 साल की बेटी ने एक संकल्प के लिए सब त्याग दिया, दूल्हा-दुल्हन बनकर यूं मनाया अंतिम बर्थडे

सार

आज के जमय में हर कोई अपना नाम और खूब पैसा कमाना चाहता है। सभी चाहते हैं कि उनके पास ढेर सारी धन-दौलत हो। लेकिन राजस्थान के नागौर से एक अलग की खबर सामने आई है। जहां करियर बनाने और सपने पूरे के समय में एक 18 साल की हिंदू लड़की सब मोह-माया त्यागकर साध्वी बनने जा रही है।


नागौर (राजस्थान). 18 साल की उम्र अमूमन जीवन को उमंग से भरने व सपने संजोने की होती है। लेकिन, नागौर जिले की झींटियां गांव की लता वैष्णव ने इस उम्र में प्रवेश करते ही   एक अनूठा संकल्प लिया है। जिसे सुन अब हर कोई हैरत में है। जी, हां दो दिन पहले ही बालिग हुई लता ने सांसारिक सुख को छोड़कर जैन साध्वी बनने का संकल्प लिया है। जिसकी दीक्षा वह अगले महीने पुष्कर में साध्वी इंदुप्रभा से ग्रहण करेगी। हिंदू परिवार में जन्म के बाद कम उम्र में जैन साध्वी बनने के लता के फैसल में परिवार का भी पूरी सहमति है। जिन्होंने  साध्वी जीवन में प्रवेश से पहले लता का अंतिम जन्म दिन 4 अप्रेल को धूमधाम से मनाया।  

दूल्हा व दुल्हन के वेश में दिखी लता, गांव में निकाला जुलूस
लता का 18वां  जन्म दिन परिवार ने धूमधाम से मनाया। इस दौरान लता को दूल्हा व दुल्हन के दोनों के वेश में सजाया गया। दूल्हे के वेश में गांवभर में उसका जुलूस भी निकाला। जिसमें काफी संख्या में ग्रामीण शामिल हुए। उसकी हर इच्छाएं पूछ-पूछकर पूरी की गई। 

जैन धर्म से यूं जुड़ा नाता
 लता के जैन धर्म से जुडऩे की एक खास वजह है। पिता सुखादास वैष्णव बताते हैं कि खेतीबाड़ी के साथ छोटा सा कारोबार कर रहे परिवार में लता से पहले  दो बेटियां थी। ऐसे में उन्हें बेटे की चाह बनी रही। इस चाह में उनकी पत्नी 14 बार गर्भवती हुई। पर इसके बाद भी उन्हें संतान का सुख नहीं मिला तो उन्होंने परिचित के कहने पर जैतारण अमृत मुनि महाराज से भेंट की। जिन्होंने भविष्य में बेटी होने पर  उन्हें गोद देने की बात कही। बकौल सुखादास जैन मुनि की कृपा से ही पहले लता व ठीक 13 महीने बाद घर में बेटा गोपीकिशन पैदा हुआ। लिहाजा संत को दिए वचन के मुताबिक 4 साल की उम्र में ही लता को श्रीमरुधर केसरी पावन धाम भेज दिया। जहां से शिक्षा- दीक्षा के बाद लता को जैन मुनि के सानिध्य में ही भेजा जा रहा है। 

आत्मा को समझना चाहती हूं: लता
जैन साध्वी बनने को लेकर लता के मन में काफी सुकून है। बकौल लता अब वह सांसारिक मोह को त्यागकर आत्मज्ञान को प्राप्त करने की दिशा में कदम  बढ़ा रही है। वह अब आत्मा को शान्ति देना चाहती हूं। लता कहती है कि अब गुरू मां ही उसे मोक्ष दिलाएगी।


 

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