Adhik Maas 2026: अधिक मास में 33 मालपुए दान करने की परंपरा क्यों? जानें महत्व और मंत्र

Published : May 21, 2026, 03:17 PM IST
Adhik Maas Tradition and Belief

सार

Adhik Maas 2026 Upay: इस बार ज्येष्ठ का अधिक मास 17 मई से शुरू हो चुका है जो 15 जून 2026 तक रहेगा। अधिक मास से जुड़े अनेक नियम और परंपराएं धर्म ग्रंथों में बताई गई हैं। अधिक मास में मालपुए दान करने का भी विशेष महत्व है।

Adhik Maas Tradition and Belief: हिंदू धर्म में अधिक मास, जिसे पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है, बेहद पुण्यदायी माना जाता है। इस बार ज्येष्ठ के अधिक मास का संयोग बना है। यह महीना भगवान विष्णु को समर्पित है। इस महीने में पूजा-पाठ, व्रत, दान और जप का विशेष महत्व बताया गया है। अधिक मास में मालपुए का दान सबसे अधिक शुभ फल देने वाला माना गया है। आगे जानिए अधिक मास में क्यों दान करते हैं मालपुए…

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अधिक मास में मालपुए का दान क्यों?

वैसे तो अधिक मास में किसी भी चीज का दान किया जा सकता है लेकिन मालपुए का दान सबसे अधिक महत्व वाला माना गया है। इसके पीछे मान्यता है कि मालपुआ घी, आटा और मिठास से तैयार किया जाता है, जो समृद्धि, सुख और शुभता का प्रतीक माना जाता है। मालपुए का दान करने से हमारे जीवन में भी ये सभी सुख प्राप्त हो सकते हैं।

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33 मालपुए का दान ही क्यों?

अधिक मास में 33 मालपुए दान किए जाते हैं। मान्यता है कि अधिक मास में 33 मालपुए दान करने से 33 कोटि देवी-देवताओं की कृपा प्राप्त होती है। दान करने से पहले इन मालपुओं का भोग भगवान विष्णु को लगाया जाता है। भगवान विष्णु को भोग लगाते समय नीचे लिखा मंत्र जरूर बोलना चाहिए-
मालपूपं मधुरं दिव्यं घृतयुक्तं मनोहरम्।
मया निवेदितं भक्त्या गृहाण पुरुषोत्तम॥
अर्थ- हे पुरुषोत्तम भगवान! घी से युक्त यह मधुर और दिव्य मालपुआ मैं आपको श्रद्धा भाव से अर्पित करता हूं, कृपया इसे स्वीकार करें।

कब करें मालपुए का दान?

वैसे तो पुरुषोत्तम मास में कभी भी मालपुए का दान किया जा सकता है लेकिन इस महीने में आने वाले गुरुवार को ये उपाय करना बहुत शुभहोता है क्योंकि गुरुवार के स्वामी भगवान विष्णु ही हैं। इसके अलावा एकादशी और पूर्णिमा तिथि पर भी मालपुए का दान करना चाहिए। इन दिनों में मालपुए दान करना विशेष फलदायी माना जाता है।

इन बातों का रखें ध्यान

भोग व दान के लिए बनाए गए मालपुए शुद्ध घी के होना चाहिए। भगवान विष्णु को पहले भोग जरूर लगाएं। इसके बाद ही मालपुए का दान करें। मालपुए का दान जरूरतमंद और भूखे लोगों को ही करें। इसी से आपको शुभ फलों की प्राप्ति होगी।


Disclaimer
इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।

 

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