
Adhik Maas Tradition and Belief: हिंदू धर्म में अधिक मास, जिसे पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है, बेहद पुण्यदायी माना जाता है। इस बार ज्येष्ठ के अधिक मास का संयोग बना है। यह महीना भगवान विष्णु को समर्पित है। इस महीने में पूजा-पाठ, व्रत, दान और जप का विशेष महत्व बताया गया है। अधिक मास में मालपुए का दान सबसे अधिक शुभ फल देने वाला माना गया है। आगे जानिए अधिक मास में क्यों दान करते हैं मालपुए…
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वैसे तो अधिक मास में किसी भी चीज का दान किया जा सकता है लेकिन मालपुए का दान सबसे अधिक महत्व वाला माना गया है। इसके पीछे मान्यता है कि मालपुआ घी, आटा और मिठास से तैयार किया जाता है, जो समृद्धि, सुख और शुभता का प्रतीक माना जाता है। मालपुए का दान करने से हमारे जीवन में भी ये सभी सुख प्राप्त हो सकते हैं।
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अधिक मास में 33 मालपुए दान किए जाते हैं। मान्यता है कि अधिक मास में 33 मालपुए दान करने से 33 कोटि देवी-देवताओं की कृपा प्राप्त होती है। दान करने से पहले इन मालपुओं का भोग भगवान विष्णु को लगाया जाता है। भगवान विष्णु को भोग लगाते समय नीचे लिखा मंत्र जरूर बोलना चाहिए-
मालपूपं मधुरं दिव्यं घृतयुक्तं मनोहरम्।
मया निवेदितं भक्त्या गृहाण पुरुषोत्तम॥
अर्थ- हे पुरुषोत्तम भगवान! घी से युक्त यह मधुर और दिव्य मालपुआ मैं आपको श्रद्धा भाव से अर्पित करता हूं, कृपया इसे स्वीकार करें।
वैसे तो पुरुषोत्तम मास में कभी भी मालपुए का दान किया जा सकता है लेकिन इस महीने में आने वाले गुरुवार को ये उपाय करना बहुत शुभहोता है क्योंकि गुरुवार के स्वामी भगवान विष्णु ही हैं। इसके अलावा एकादशी और पूर्णिमा तिथि पर भी मालपुए का दान करना चाहिए। इन दिनों में मालपुए दान करना विशेष फलदायी माना जाता है।
भोग व दान के लिए बनाए गए मालपुए शुद्ध घी के होना चाहिए। भगवान विष्णु को पहले भोग जरूर लगाएं। इसके बाद ही मालपुए का दान करें। मालपुए का दान जरूरतमंद और भूखे लोगों को ही करें। इसी से आपको शुभ फलों की प्राप्ति होगी।
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