Varada Chaturthi Vrat Katha: राजा ने सांपों से कैसे बचाया अपनी प्रजा को? पढ़ें वरदा चतुर्थी का ये रोचक कथा

Published : May 20, 2026, 06:00 AM IST
Varada Chaturthi Vrat Katha

सार

Varada Chaturthi Vrat Katha In Hindi:अधिक मास के ज्येष्ठ मास की चतुर्थी को वरदा चतुर्थी कहते हैं। इस बार ज्येष्ठ का अधिक मास 17 मई से शुरू हो चुका है जिसमें वरदा चतुर्थी का व्रत 20 मई, बुधवार को किया जाएगा। 3 साल में एक बार वरदा चतुर्थी व्रत का संयोग बनता है। 

Varada Chaturthi Story: धर्म ग्रंथों में वरदा चतुर्थी व्रत का विशेष महत्व बताया गया है क्योंकि ये 3 साल में एक बार आता है। मान्यता है कि इस व्रत को करने से भगवान गणेश भक्तों के सभी संकट दूर करते हैं और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं। गणेश पुराण में वरदा चतुर्थी से जुड़ी एक रोचक कथा का वर्णन मिलता है, जिसमें बताया गया है कि कैसे एक राजा ने इस व्रत के प्रभाव से अपने राज्य को भयंकर संकट से बचाया था। इस कथा को पढ़े बिना व्रत का पूरा फल नहीं मिलता। आगे पढ़ें ये कथा…

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वरदा चतुर्थी व्रत कथा हिंदी में

प्राचीन समय में आंध्र प्रदेश में राजा सुषेण नाम के एक धर्मात्मा राजा शासन करते थे। वे न्यायप्रिय, दानवीर और पराक्रमी थे। उनके राज्य में सुख-शांति थी और सभी लोग खुशहाल जीवन जीते थे। लेकिन एक समय ऐसा आया जब उनके राज्य में जहरीले सर्पों का आतंक फैल गया।

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विषैले नाग राज्य में जगह-जगह घूमने लगे और लोगों को डसने लगे। सर्पदंश के कारण कई लोगों की मृत्यु हो गई। डर के कारण लोग घर छोड़कर जंगलों में छिपने लगे। नाग पंचमी व्रत और कई धार्मिक उपाय करने के बाद भी सर्पों का प्रकोप कम नहीं हुआ।
अपनी प्रजा की हालत देखकर राजा सुषेण बहुत दुखी हुए और अपने गुरु ऋषि जैमिनि के पास पहुंचे। राजा ने उनसे इस संकट से बचने का उपाय पूछा। तब ऋषि जैमिनि ने कहा कि राज्य में चतुर्थी व्रत का पालन बंद हो गया है, इसी कारण ये संकट आया है।
उन्होंने बताया कि शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को “वरदा चतुर्थी” कहा जाता है, जो धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष देने वाली मानी गई है। वहीं कृष्ण पक्ष की चतुर्थी “संकष्टी चतुर्थी” कहलाती है, जो सभी संकटों का नाश करती है।
ऋषि जैमिनि की बात मानकर राजा सुषेण ने अधिक मास में आने वाली वरदा चतुर्थी का व्रत पूरे विधि-विधान से किया। इसके बाद राज्य की प्रजा ने भी श्रद्धा से भगवान गणेश की पूजा शुरू कर दी। मान्यता है कि इसके प्रभाव से सर्पों का आतंक समाप्त हो गया और राज्य में फिर से सुख-शांति लौट आई।


Disclaimer
इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।

 

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