Varada Chaturthi 2026 Kab Hai: ज्येष्ठ का अधिक मास 17 मई से शुरू हो चुका है। इस महीने की विनायकी चतुर्थी को वरदा चतुर्थी कहते हैं। वरदा चतुर्थी का संयोग 3 साल में एक बार बनता है।
Varada Chaturthi Vart Kab Kare: धर्म ग्रंथों में अधिक मास का विशेष महत्व बताया गया है। इस महीने में किए गए व्रत बहुत ही शुभ फल देने वाले माने गए हैं। इस बार ज्येष्ठ का अधिक मास 17 मई से शुरू हो चुका है। इस महीने के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को वरदा चतुर्थी कहते हैं। चूंकि अधिक मास 3 साल में एक बार आता है इसलिए वरदा चतुर्थी का व्रत भी 3 साल में एक बार ही किया जाता है। आगे जानिए इस बार कब है वरदा चतुर्थी, इसकी पूजा विधि और शुभ मुहूर्त आदि की डिटेल…
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कब करें वरदा चतुर्थी व्रत 2026?
पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ के अधिक मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि 19 मई, मंगलवार की दोपहर 02 बजकर 18 मिनिट से शुरू होगी जो अगले दिन यानी 20 मई, बुधवार की सुबह 11 बजकर 07 मिनिट तक रहेगी। चूंकि चतुर्थी तिथि का सूर्योदय 20 मई को होगा, इसलिए इसी दिन वरदा चतुर्थी का व्रत किया जाएगा।
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वरदा चतुर्थी 2026 शुभ मुहूर्त
सुबह 10:56 से 11:06 तक (श्रेष्ठ मुहूर्त)
सुबह 10:44 से दोपहर 12:23 तक
दोपहर 12:23 से 02:02 तक
दोपहर 03:40 से शाम 05:19 तक
वरदा चतुर्थी व्रत-पूजा विधि
- 20 मई, बुधवार को सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करें और व्रत-पूजा का संकल्प लें। शुभ मुहूर्त से पहले पूजा की पूरी तैयारी कर लें।
- मुहूर्त शुरू होने पर घर में किसी साफ स्थान पर श्रीगणेश की प्रतिमा स्थापित कर तिलक लगाएं और फूलों की माला पहनाएं।
- इसके बाद शुद्ध घी का दीपक भी जलाएं। श्रीगणेश को रोली, दूर्वा, वस्त्र, जनेऊ, अबीर, गुलाल, पान आदि चीजें अर्पित करें।
- पूजा के दौरान मन ही मन में ऊं गं गणपतये नम: मंत्र का जाप करते रहें। भगवान को मोतीचूर के लड्डू का भोग लगाएं।
- इसके बाद सपरिवार भगवान की आरती करें। रात को चंद्रोदय होने पर जल से अर्ध्य दें और फूल-चावल व कुमकुम चढ़ाएं।
- इस तरह एकदंत संकष्टी चतुर्थी का व्रत करने से घर में सुख-समृद्धि और शांत बनी रहती है, साथ ही संकटों का नाश होता है।
गणेशजी की आरती लिरिक्स हिंदी में
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा ॥
एक दंत दयावंत, चार भुजाधारी
माथे पे सिंदूर सोहे, मूसे की सवारी ॥
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा ॥
अंधन को आंख देत, कोढ़िन को काया
बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया ॥
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा ॥
हार चढ़ै, फूल चढ़ै और चढ़ै मेवा
लड्डुअन को भोग लगे, संत करे सेवा ॥
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा ॥
दीनन की लाज राखो, शंभु सुतवारी
कामना को पूर्ण करो, जग बलिहारी ॥
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा ॥
Disclaimer
इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।
