
kamakhya temple interesting facts: हमारे देश में तंत्र-मंत्र के लिए अनेक सिद्ध स्थान हैं। इन्हीं में से एक है कामाख्या मंदिर। ये मंदिर असम के गुवाहाटी में स्थित एक प्रसिद्ध शक्तिपीठ है। मान्यता है कि इसी स्थान पर देवी सती का योनी भाग गिरा था। यहां कि कुछ परंपराएं बहुत ही अजीब और रोचक हैं। हर साल जून मान में यहां एक मेला लगता है, जिसे अंबुबाची कहते हैं। इन 3 दिनों में दूर-दूर से तांत्रिक यहां आकर तंत्र साधना करते हैं। आगे जानिए इस बार कब से शुरू होगी अंबुबाची मेला और इससे जुड़ी रोचक बातें…
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मिली जानकारी के अनुसार इस बार अंबुबाची मेले की शुरूआत 22 जून से होगी। इस दिन रात को विधि-विधान से पूजा करने के बाद मंदिर के कपाट बंद कर दिए जाएंगे, जो अगले 3 दिन तक यानी 25 जून तक बंद ही रहेंगे। इस दौरान कोई भी मंदिर में प्रवेश नहीं करेगा। 26 जून की सुबह मंदिर के कपाट खोलकर साफ-सफाई करने के बाद भक्त यहां दर्शन कर पाएंगे।
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अंबुबाची मेले से जुड़ी मान्यता साल में एक बार माता कामाख्या रजस्वला (मासिक धर्म) होती हैं। इस दौरान कोई भी माता के दर्शन नहीं करता। 3 दिन बाद यानी रजस्वला समाप्ति के बाद मंदिर के कपाट खोले जाते हैं। इन 3 दिनों में यहां दूर-दूर से तांत्रिक तंत्र क्रिया के लिए आते हैं। एक खास बात ये भी है कि मंदिर के कपाट बंद करने से पहले माता के योनी भाग के ऊपर एक सफेद वस्त्र रखा जाता है। 3 दिन बाद जब मंदिर के कपाट खोलते हैं तो ये वस्त्र लाल हो जाता है। ऐसा क्यों होता है, ये बात आज तक कोई समझ नहीं पाया।
धर्म ग्रंथों के अनुसार, देवी सती की मृत्यु के बाद भगवान शिव व्याकुल होकर उनके शव को लेकर ब्रह्मांड में घूमने लगे। तब भगवान विष्णु ने अपने चक्र से सती के मृत शरीर के टुकड़े कर दिए। जहां-जहां भी देवी सती के शरीर के अंग गिरे, वे स्थान शक्तिपीठ कहलाए। मान्यता है कि कामाख्या शक्तिपीठ पर देवी सती का योनी भाग गिरा था। ये मंदिर तंत्र-मंत्र की सिद्धि के लिए भी काफी प्रसिद्ध है। यहां रोज सैकड़ों पशुओं की बलि दी जाती है।
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इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।
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