
Apra Ekadashi Kab Hai: ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को अपरा और अचला एकादशी के नाम से जाना जाता है। इस बार ये व्रत 13 मई, बुधवार को किया जाएगा। एकादशी व्रत से जुड़े नियम धर्म ग्रंथों में बताए गए हैं। इस व्रत में लोग फलाहार कर सकते हैं। दूध भी फलाहार के अंतर्गत ही आता है। इसलिए लोग व्रत के दौरान दूध और इससे बनी चीजों जैसे छाछ और दही का उपयोग भी करते हैं। लेकिन उपवास के दौरान दूध से जुड़े कुछ नियम भी हैं जिनका पालन जरूर करना चाहिए। आगे जानिए क्या दूध पीने से भी एकादशी व्रत टूट सकता है?
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नियमों के अनुसार व्रत के दौरान दूध पी सकते हैं लेकिन ये दूध गाय का होना चाहिए। भैंस या बकरी का दूध व्रत के दौरान नहीं पीना चाहिए। गाय का दूध सबसे शुद्ध और सात्विक माना जाता है। कई धार्मिक ग्रंथों और व्रत नियमों में इसकी जानकारी मिलती है। गाय के दूध से शास्त्रों में अमृत के समान माना गया है। व्रत के दौरान इसे पीने से मन में सात्विकता और पवित्रता बनी रहती है।
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धर्म ग्रंथों में गाय को देवतुल्य माना गया है। गाय का उत्पत्ति समुद्र मंथन से हुई मानी जाती है। हवन आदि धार्मिक कामों में भी गाय के दूध का ही उपयोग किया जाता है। गाय को दूध को अमृत के समान माना गया है। मेडिकल साइंस के अनुसार भी गाय का दूध पोषक तत्वों से भरपूर होता है और ये आसानी से पच भी जाता है। यही कारण है कि व्रत के दौरान गाय का दूध ही पीना चाहिए।
धर्म ग्रंथों में भैंस-बकरी आदि के दूध को पूरी तरह से शुद्ध नहीं माना गया है। ऐसा भी कहा जाता है कि भैंस-बकरी का दूध पीने से मन में बुरे विचार आ सकते हैं जिससे व्रत भंग हो सकता है। इसलिए व्रत-उपवास के दौरान भैंस और बकरी के दूध का सेवन करने से बचने की सलाह दी जाती है। माना जाता है कि ये दूध उतने सात्विक नहीं माने जाते जितना गाय का दूध। इसलिए व्रत की शुद्धता बनाए रखने के लिए गाय के दूध को प्राथमिकता दी जाती है।
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