कौन थी अर्जुन की चौथी पत्नी, इससे विवाह के लिए कौन-सी शर्त थी?

Published : Jun 05, 2026, 04:08 PM IST
Who was Arjuna's fourth wife

सार

Mahabharata Interesting facts: महाभारत के अनुसार अर्जुन की कितनी पत्नियां थीं? अर्जुन की चौथी पत्नी किस राज्य की राजकुमारी थी? अर्जुन की चौथी पत्नी के पुत्र का क्या नाम था?

Mahabharata Fact: महाभारत में अनेक रहस्यमयी कथाएं छिपी हैं, जिनके बारे में कम ही लोगों को पता है। अर्जुन महाभारत के प्रमुख पात्रों में से एक थे। उनकी पत्नी, द्रौपदी और सुभद्रा के बारे में तो सभी जानते हैं लेकिन इनके अलावा उनकी 2 पत्नियां और भी थीं। अर्जुन की तीसरी पत्नी एक नागकन्या थी, जिसका नाम उलूपी था। अर्जुन की चौथी पत्नी के बारे में बहुत कम लोगों को पता है। आगे जानिए कौन-थी अर्जुन की चौथी पत्नी, किस कहां की राजकुमारी थी और इससे शादी के लिए अर्जुन को कौन-सी शर्त माननी पड़ी?

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कौन थी अर्जुन की चौथी पत्नी?

महाभारत के अनुसार एक बार नियम भंग करने के कारण अर्जुन को अकेले ही 12 साल के वनवास पर जाना पड़ा। इस दौरान अर्जुन घूमते-घूमते मणिपुर पहुंच गए। यहां के राजा चित्रवाहन थे। उनकी एक पुत्री थी, जिसका नाम चित्रांगदा था। वह बहुत ही सुंदर और युद्धकला का निपुण थी। अर्जुन ने जब चित्रांगदा को देखा तो उसके प्रति आकर्षित हो गए। अर्जुन ने राजा चित्रवाहन के सामने उनकी पुत्री से विवाह का प्रस्ताव रखा। राजा ने भी अर्जुन की बात मान ली।

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विवाह के लिए रखी गई ये अनोखी शर्त?

राजा चित्रवाहन की कोई पुत्र संतान नहीं थी, एकमात्र चित्रांगदा ही उनकी पुत्री थी। राजा चित्रवाहन ने विवाह से पहले अर्जुन के सामने शर्त रखी कि ‘मेरी पुत्री सदैव मेरे ही पास रहेगी और उससे होने वाली संतान मेरे राज्य की उत्तराधिकारी होगी। वही मणिपुर का राज्य संभालेगी। अर्जुन ने राजा चित्रवाहन की ये बात मान ली और चित्रांगदा से विवाह कर लिया।

अर्जुन का पुत्र बभ्रुवाहन बना मणिपुर का राजा

चित्रांगदा से विवाह के बाद अर्जुन कुछ समय तक मणिपुर में ही रहे। इस दौरान चित्रांगदा ने एक पुत्र को जन्म दिया, जिसका नाम बभ्रुवाहन रखा गया। लेकिन शर्त के अनुसार अर्जुन को अपनी पत्नी और पुत्र को छोड़कर पुन: हस्तिनापुर जाना पड़ा। आगे चलकर बभ्रुवाहन ही मणिपुर का राजा बना।

अर्जुन और बभ्रुवाहन का हुआ युद्ध

महाभारत युद्ध के बाद पांडवों ने जब अश्वमेध यज्ञ किया तो अर्जुन को उसका रक्षक बनाया गया। यज्ञ का घोड़ा घूमते-घूमते मणिपुर पहुंच गया। वहां अर्जुन का अपने पुत्र बभ्रुवाहन से भयंकर युद्ध हुआ, जिसमें अर्जुन की मृत्यु हो गई। बाद में अर्जुन की तीसरी पत्नी उलूपी ने नागमणि की सहायता से अर्जुन को पुनर्जीवित कर दिया।


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