
Bhaumvati Amavasya July 2026: अमावस्या तिथि के स्वामी पितृ देव हैं। इसलि इस तिथि पर पितरों की शांति के लिए विशेष उपाय किए जाते हैं। एक साल में कुल 12 अमावस्या होती है, इन सभी के नाम और महत्व आदि अलग-अलग हैं। इनमें से आषाढ़ मास की अमावस्या का नाम हलहारिणी है। इस बार ये अमावस्या 14 जुलाई, मंगलवार को पड़ रही है। मंगलवार को अमावस्या होने से ये भौमवती अमावस्या कहलाएगी। इसका महत्व अन्य अमावस्या से काफी अधिक माना गया है। आगे जानिए भौमवती अमावस्या से जुड़े रोचक फैक्ट…
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धर्म ग्रंथों के अनुसार जब किसी मंगलवार को अमावस्या का संयोग बनता है तो इसे भौमवती अमावस्या कहते हैं। ये अमावस्या संक्रांति के समान ही शुभ फल देने वाली मानी गई है। इस दिन पवित्र नदी में स्नान करने और जरूरतमंदों को दान देने का विशेष महत्व है। ऐसा करने से जीवन में सुख-समृद्धि और शांति बनी रहती है।
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सुबह 09:13 से 10:53 तक
सुबह 10:53 से दोपहर 12:32 तक
दोपहर 12:06 से 12:59 तक (अभिजीत मुहूर्त)
दोपहर 12:32 से 02:12 तक
दोपहर 03:52 से 05:31 PM
1. भौम का अर्थ है मंगल, इसलिए भौमवती अमावस्या पर मंगलदेव से संबंधित उपाय करने चाहिए। इस दिन मंगलदेव के मंत्रों का जाप करने से शुभ फल मिलते हैं।
2. अगर आपकी कुंडली में मंगल दोष है तो भौमवती अमावस्या पर किसी योग्य विद्वान की सलाह लेकर भात पूजन करवाएं। इससे आपकी परेशानी दूर हो सकती हैं।
3. भौमवती अमावस्या पर मंगल ग्रह से संबंधित चीजों जैसे मसूर की दाल, लाल चंदन, लाल कपड़े और लाल फलों का दान जरूरतमंदों को करें।
4. अगर आप जमीन से संबंधित व्यापार करते हैं तो भौमवती अमावस्या पर अपने घर में मंगल यंत्र स्थापित कर रोज इसकी पूजा करें।
5. अमावस्या तिथि के स्वामी पितृदेव हैं। भौमवती अमावस्या पर पितरों की शांति के लिए तर्पण, पिंडदान आदि करें। इससे पितरों की कृपा आप पर बनी रहेगी।
Disclaimer
इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।
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