Chaiti Chhath Date 2026: कब है चैती छठ? जानें नहाय खाय-खरना से उषा अर्घ्य तक पूरी डेट और नियम

Published : Mar 21, 2026, 01:18 PM IST
Chaiti Chhath 2026

सार

Chaiti Chhath 2026 Kab Hai: चैती छठ 2026 कब है? जानिए चैती छठ की पूरी डेट, नहाय-खाय, खरना, संध्या अर्घ्य और उषा अर्घ्य का सही समय क्या है? साथ ही जानिए चैती छठ पर्व का धार्मिक महत्व।

Chaiti Chhath 2026 Date: हिंदू धर्म में सूर्य उपासना का सबसे पवित्र और कठोर व्रत माने जाने वाले छठ पर्व का चैत्र माह में आने वाला रूप चैती छठ खास आध्यात्मिक महत्व रखता है। यह व्रत न सिर्फ आस्था का प्रतीक है, बल्कि जीवन में सुख-समृद्धि, संतान सुख और रोगों से मुक्ति दिलाने वाला भी माना जाता है। ऐसे में अगर आप भी 2026 में चैती छठ रखने की तैयारी कर रहे हैं, तो यहां देखिए चैती छठ पर्व की पूरी टाइमलाइन, तिथियां और हर दिन का महत्व।

चैती छठ 2026 कब से शुरू और कब खत्म होगा?

साल 2026 में चैती छठ का चार दिवसीय महापर्व 22 मार्च (रविवार) से शुरू होकर 25 मार्च (बुधवार) तक चलेगा। इन चार दिनों में व्रती बेहद नियम और श्रद्धा के साथ सूर्य देव और छठी मैया की पूजा करते हैं।

चैती छठ पहला दिन: नहाय-खाय (22 मार्च 2026): व्रत की शुद्ध शुरुआत कैसे करें?

चैती छठ की शुरुआत नहाय-खाय से होती है। इस दिन व्रती सुबह स्नान करके घर और पूजा स्थल को शुद्ध करते हैं। भगवान सूर्य और कुल देवता की पूजा की जाती है। भोजन में कद्दू-भात (सात्विक खाना) ग्रहण किया जाता है। यह दिन शरीर और मन की शुद्धि का प्रतीक माना जाता है, जिससे व्रत की नींव मजबूत होती है।

चैती छठ दूसरा दिन: खरना (23 मार्च 2026): 36 घंटे का कठिन व्रत कब शुरू होता है?

खरना का दिन छठ व्रत का सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव होता है। व्रती दिनभर उपवास रखते हैं और शाम को गुड़ की खीर और रोटी का भोग लगाकर प्रसाद ग्रहण करते हैं। इसी के बाद शुरू होता है 36 घंटे का निर्जल व्रत, जिसमें पानी तक नहीं लिया जाता।

चैती छठ तीसरा दिन: संध्या अर्घ्य (24 मार्च 2026): डूबते सूर्य को अर्घ्य क्यों दिया जाता है?

इस दिन छठ पूजा का सबसे भावनात्मक और भव्य दृश्य देखने को मिलता है। व्रती नदी, तालाब या घाट पर जाकर डूबते सूर्य को अर्घ्य देते हैं। सूप में फल, ठेकुआ और पूजा सामग्री अर्पित की जाती है। मान्यता है कि डूबते सूर्य की पूजा से जीवन की कठिनाइयों और कष्टों का अंत होता है।

चैती छठ चौथा दिन: उषा अर्घ्य (25 मार्च 2026): उगते सूर्य की पूजा का क्या महत्व है?

चैती छठ का अंतिम दिन उषा अर्घ्य होता है। प्रातःकाल लगभग 06:20 बजे उगते सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा। इसके बाद व्रत का पारण किया जाता है। उगते सूर्य को अर्घ्य देना नए जीवन, ऊर्जा और सकारात्मक शुरुआत का प्रतीक माना जाता है।

चैती छठ का धार्मिक महत्व क्या है?

चैती छठ को आस्था, अनुशासन और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता का पर्व माना जाता है। सूर्य देव को प्रत्यक्ष देवता मानकर उनकी पूजा की जाती है। छठी मैया को संतान और परिवार की सुख-समृद्धि की देवी माना जाता है। यह व्रत जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, स्वास्थ्य और समृद्धि लाने वाला माना गया है।

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Anita Tanvi

अनीता तन्वी। मीडिया जगत में 15 साल से ज्यादा का अनुभव। मौजूदा समय में ये एशियानेट न्यूज हिंदी के साथ जुड़कर एजुकेशन सेगमेंट संभाल रही हैं। इन्होंने जुलाई 2010 में मीडिया इंडस्ट्री में कदम रखा और अपने करियर की शुरुआत प्रभात खबर से की। पहले 6 सालों में, प्रभात खबर, न्यूज विंग और दैनिक भास्कर जैसे प्रमुख प्रिंट मीडिया संस्थानों में राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय, ह्यूमन एंगल और फीचर रिपोर्टिंग पर काम किया। इसके बाद, डिजिटल मीडिया की दिशा में कदम बढ़ाया। इन्हें प्रभात खबर.कॉम में एजुकेशन-जॉब/करियर सेक्शन के साथ-साथ, लाइफस्टाइल, हेल्थ और रीलिजन सेक्शन को भी लीड करने का अनुभव है। इसके अलावा, फोकस और हमारा टीवी चैनलों में इंटरव्यू और न्यूज एंकर के तौर पर भी काम किया है।Read More...
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