
Lunar Eclipse 2026: चंद्र ग्रहण का मानव जीवन पर असर होता है, ऐसा ज्योतिष शास्त्र मानता है। साल 2 या 2 बार चंद्र ग्रहण का संयोग बनता है। इस बार रक्षाबंधन पर चंद्र ग्रहण होने जा रहा है जिसे लेकर लोगों के मन में कईं सारे सवाल हैं जैसे- क्या चंद्रग्रहण के दौरान बहनें भाई की कलाई पर राखी बांध सकेगी और चंद्र ग्रहण का सूतक कब से कब तक रहेगा, इस दौरान क्या करें-क्या नहीं? उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. नलिन शर्मा से जानें इन सवालों के जवाब…
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वैज्ञानिकों के अनुसार इस बार साल 2026 का दूसरा चंद्र ग्रहण 28 अगस्त, शुक्रवार को होगा। इस दिन श्रावण मास की पूर्णिमा तिथि रहेगी। हर साल इसी तिथि पर रक्षाबंधन का पर्व मनाया जाता है। रक्षाबंधन पर चंद्र ग्रहण का संयोग बहुत ही दुर्लभ है जो कईं दशकों में एक बार बनता है।
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भारतीय समय के अनुसार 28 अगस्त को चंद्र ग्रहण सुबह 08 बजकर 04 मिनिट से शुरू होगा, जो 11 बजकर 22 मिनिट तक रहेगा। यानी इस चंद्र ग्रहण की कुल अवधि 03 घंटे 17 मिनिट की रहेगी। चंद्र ग्रहण का मध्य काल सुबह 09 बजकर 43 मिनिट पर रहेगा।
ज्योतिष मान्यता के अनुसार चंद्र ग्रहण शुरू होने से 9 घंटे पहले इसका सूतक शुरू हो जाता है। जिन देशों में जिस समय चंद्र ग्रहण शुरू होगा, उसी के अनुसार 9 घंटे पहले इसका सूतक शुरू माना जाएगा। जिन देशों में ये चंद्र ग्रहण दिखाई देगा, सिर्फ वहीं इसका सूतक माना जाएगा, अन्य स्थानों पर नहीं।
विद्वानों के अनुसार 28 अगस्त को होने वाला चंद्र ग्रहण भारत में कहीं भी दिखाई नहीं देगा जिसके चलते यहां इसका कोई भी नियम जैसे सूतक आदि मान्य नहीं होगा। ये चंद्र ग्रहण अंटार्कटिका, अफ्रीका, यूरोप, एशिया के कुछ देश, हिंद महासागर, प्रशांत महासागर और अंटलांटिक महासागर के देशों में देखा जा सकेगा।
चूंकि 28 अगस्त को होने वाला चंद्र ग्रहण भारत में कहीं भी दिखाई नहीं देगा इसलिए यहां रक्षा बंधन पर्व पर भी इसका कोई असर नहीं होगा। बहनें शुभ मुहूर्त देखकर पूरे दिन अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांध सकेंगी।
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