थाली में जूठा दही छोड़ना क्यों माना जाता है अशुभ? जानें इसके पीछे की धार्मिक मान्यता

Bimla Kumari   | CMS
Published : Sep 11, 2026, 03:13 PM IST
Curd and Rahu

सार

Dahi Jhootha Chhodna: दही-चीनी की परंपरा से लेकर पंचामृत, स्कंद पुराण के काशी खंड में रात में दही से बचने का उल्लेख, दही गिरने के शकुन-अपशकुन और थाली में जूठा दही छोड़ने से जुड़ी मान्यताएं जानें। ज्योतिष में चंद्र-राहु का संदर्भ और भोजन नष्ट न करने की सीख भी पढ़ें।

Thali Mein Jhootha Dahi: भारतीय घरों में दही का इस्तेमाल सिर्फ भोजन का स्वाद बढ़ाने के लिए नहीं होता, बल्कि इसे शुभता और समृद्धि से भी जोड़कर देखा जाता है। पूजा-पाठ से लेकर मांगलिक कार्यों तक दही की अपनी खास जगह है। यही वजह है कि कई परिवारों में थाली में जूठा दही छोड़ने या इसे व्यर्थ करने से बचने की सीख दी जाती है। लेकिन आखिर इसके पीछे धार्मिक मान्यता क्या है और इसका व्यवहारिक पक्ष क्या कहता है?

पूजा और शुभ कार्यों में दही का खास महत्व

दही को भारतीय परंपरा में सात्त्विक आहार माना गया है। पंचामृत में दूध, दही, घी, शहद और शक्कर का इस्तेमाल होता है, इसलिए धार्मिक अनुष्ठानों में भी इसका विशेष महत्व माना जाता है। भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं में भी माखन और दही का उल्लेख मिलता है। इसी वजह से दही को कई परंपराओं में पवित्र और शुभ भोजन के रूप में देखा जाता है।

दही-चीनी खिलाने की परंपरा क्यों है?

किसी शुभ काम, परीक्षा या यात्रा पर निकलने से पहले दही-चीनी खिलाने की परंपरा भारत के कई हिस्सों में आज भी प्रचलित है। इसे शुभ शुरुआत और सकारात्मक सोच से जोड़कर देखा जाता है।

इसके पीछे वैज्ञानिक रूप से सफलता की कोई गारंटी नहीं है, लेकिन परंपरा के स्तर पर यह व्यक्ति का मनोबल बढ़ाने और अच्छे भाव के साथ काम शुरू करने का प्रतीक जरूर माना जाता है।

ज्योतिष में दही का चंद्रमा से संबंध

ज्योतिषीय मान्यताओं में दही को चंद्रमा से संबंधित माना गया है। मान्यता है कि दही का सेवन या उससे जुड़े कुछ उपाय कमजोर चंद्रमा से संबंधित स्थितियों में किए जा सकते हैं। वहीं, कुछ धार्मिक मान्यताओं में राहु से जुड़े दोषों के उपाय के तौर पर दही और काले तिल के दान का उल्लेख मिलता है। हालांकि, ऐसी बातें धार्मिक और ज्योतिषीय विश्वासों का हिस्सा हैं, इन्हें वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित तथ्य नहीं माना जाना चाहिए।

रात में दही खाने को लेकर क्या मान्यता है?

कुछ धार्मिक ग्रंथों और पारंपरिक मान्यताओं में रात के समय दही खाने से बचने की सलाह मिलती है। स्कंद पुराण के काशी खंड से भी इस संदर्भ को जोड़ा जाता है। इसे भारतीय परंपरा में भोजन के समय, मात्रा और दिनचर्या से जुड़े नियमों के रूप में समझा जा सकता है। हालांकि, आज के समय में भोजन से जुड़े ऐसे नियमों को व्यक्ति की सेहत और जरूरत के अनुसार समझना जरूरी है।

दही गिरना या जूठा छोड़ना क्यों माना जाता है अशुभ?

लोक मान्यता में दही का अचानक गिर जाना, खासकर किसी महत्वपूर्ण काम के लिए निकलते समय, अशुभ संकेत माना जाता है। ऐसी स्थिति में कुछ लोग चंद्र देव का स्मरण करते हैं और आगे सावधानी बरतते हैं।

इसी तरह थाली में जूठा दही छोड़ने को भी कई परिवारों में अच्छा नहीं माना जाता। कुछ लोक मान्यताओं में इसे आयु पर विपरीत प्रभाव से जोड़ा गया है, लेकिन इस बात का कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।

असल में इसके पीछे एक व्यवहारिक सीख भी समझी जा सकती है। भारतीय संस्कृति में अन्न को सम्मान देने और भोजन की बर्बादी से बचने पर जोर दिया गया है। इसलिए जितनी जरूरत हो, उतना ही दही लेना और खाने के बाद उसे व्यर्थ न छोड़ना एक अच्छी आदत है।

डिस्क्लेमर: इस लेख में बताई गई धार्मिक, ज्योतिषीय और लोक मान्यताएं परंपराओं पर आधारित हैं। इन्हें वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित तथ्य या अंतिम सत्य न मानें।

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