Ganesh Chaturthi 2026: गणेश चतुर्थी पर क्यों नहीं देखते चांद? जानें चंद्र दर्शन से जुड़ी कथा और उपाय

Published : Sep 11, 2026, 02:58 PM IST
Ganesh Chaturthi Moon Sighting Remedy

सार

Ganesh Chaturthi 2026 Facts: गणेश चतुर्थी पर चंद्रमा के दर्शन क्यों वर्जित माने जाते हैं? जानें भगवान गणेश और चंद्रदेव से जुड़ी पौराणिक कथा और गलती से चांद दिख जाए तो क्या उपाय करें।

गणेश चतुर्थी इस साल 14 सितंबर को मनाई जाएगी। मंदिरों से लेकर घरों में तैयारियां अंतिम चरणों पर हैं। इस दिन भगवान गणेश की पूजा और उनके स्वागत का विधान है। घर-घर में बप्पा की मूर्ति स्थापित की जाती है और विधि-विधान से पूजा की जाती है। यह दिन अपने आप में खास है लेकिन क्या आप जानते हैं विनायक चतुर्थी पर रात में चांद देखने से मना किया जाता है। आइए जानते हैं ऐसा क्यों हैं ?

गणेश चतुर्थी पर चांद क्यों नहीं देखा जाता ?

पौराणिक कथाओं के अनुसार, एक बार जब भगवान गणेश अपने वाहन मूषक पर सावर होकर यात्रा कर रह थे, उसी दौरान मूषक का संतुलन बिगड़ गया और गणेश जी नीचे गिर पड़े। उस वक्त वहां पर चंद्रदेव भी मौजूद थे। इस दृश्य को देखकर चंद्र देव गणेश जी का उपहास उड़ाने लगे। चंद्रमा के इस व्यवहार से क्रोधित होकर गणेश जी ने श्राप दिया कि भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी के दिन जो भी व्यक्ति चंद्रमा के दर्शन करेगा, उस पर झूठ का कलंक लगेगा। बाद में चंद्रदेव ने अपनी गलती के लिए क्षमा मांगी। जिसके बाद गणेश जी ने श्राप के प्रभाव को सीमित कर दिया। तभी से विनायक चतुर्थी पर चंद्रमा न देखने की परंपरा चली आ रही है।

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गलती से चंद्रमा देखने पर क्या उपाय करें ?

अगर आपने किसी कारणवश गलती से या अनजाने में गणेश चतुर्थी पर चंद्रमा देख लिया है तो घबराने की बजाय धार्मिक परंपराओं से जुड़े कुछ उपाय कर सकते हैं।

  • भगवान गणेश से क्षमा मांगे- सबसे पहले भगवान के सामने श्रद्धापूर्वक प्रार्थना करें और अनजाने में की गई गलती के लिए माफी मांगे। आप चाहे तो बप्पा को दूर्वा भी अर्पित कर सकते हैं।

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  • मंत्र जाप करें- गलती की माफी मांगने के लिए भगवान गणेश के प्रसिद्ध मंत्र ओम गण गणपतये नम: का जाप कर सकते हैं।
  • मोदक का भोग- भगवान गणेश को मोदक प्रिय हैं। चंद्र दर्शन की क्षमा मांगने और गणपति को प्रसन्न करने के लिए मोदक का भोग भी लगा सकते हैं।

अनजाने में चंद्रमा दर्शन हो जाने पर डरने या तनाव लेने की जरूरत नहीं है। यह एक धार्मिक मान्यता है। श्रद्धा के साथ भगवान की पूजा और उनसे क्षमा-प्रार्थना मांगे।

Disclaimer

इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।

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