Ganesh Chaturthi 2026: पहली बार घर में गणपति बप्पा ला रहे हैं तो जानें गणेश चतुर्थी पर मूर्ति स्थापना, पूजा विधि, जरूरी सामग्री और किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

साल 2026 में गणेश चतुर्थी 14 सितंबर दिन सोमवार को मनाई जाएगी। ये त्योहार भगवान गणेश के स्वागत और उनकी भक्ति का पर्व है। महाराष्ट्र सहित देश के कई हिस्सो में लोग हर साल घर में गणपति बप्पा की स्थापना करते हैं और फिर उनकी विदाई भी धूमधाम से की जाती है। अगर आप पहली बार गणेश जी को घर ला रहे हैं, तो मूर्ति कहां रखें, स्थापना कैसे करें, पूजा में क्या सामग्री चाहिए आदि सवाल मन में जरूर आ रहे होंगे। जानिए गणेश चतुर्थी पूजा विधि के बारे में।

गणेश चतुर्थी में गणेश प्रतिमा कैसे घर लाएं?

पहली बार गणपति स्थापना कर रहे हैं तो ऐसी प्रतिमा चुनें जिसे आप श्रद्धा और अपनी सुविधा के अनुसार विधि-विधान से पूज सकें। मिट्टी या प्राकृतिक सामग्री से बनी प्रतिमा पर्यावरण की दृष्टि से अच्छा विकल्प रहेगी। आप चाहे तो घर पर ही मिट्टी की मदद से ईको फ्रेंडली गणपति बप्पा की मूर्ति बना सकते हैं।

घर में कहां करें गणपति की स्थापना?

गणेश जी की स्थापना के लिए घर का साफ-सुथरा और शांत स्थान चुनें। पूजा स्थल को पहले अच्छी तरह साफ कर लें। इसके बाद वहां चौकी रखें और उस पर साफ लाल या पीले रंग का कपड़ा बिछाएं। चौकी को फूलों और आसपास रंगोली से सजा सकते हैं। मूर्ति को ऐसी जगह रखें जहां परिवार के लोग पूजा कर सके। स्थापना के दिन सुबह स्नान करके साफ कपड़े पहनें। पूजा की जगह को साफ करें और चौकी पर वस्त्र बिछाएं। इसके बाद पूजा की जरूरी सामग्री पास में रख लें।

गणेश चतुर्थी पूजा सामग्री में क्या खरीदें?

  • गणेश जी की प्रतिमा
  • चौकी और साफ वस्त्र
  • कलश
  • जल
  • अक्षत यानी चावल
  • रोली या कुमकुम
  • हल्दी
  • दूर्वा
  • लाल या पीले फूल
  • माला
  • धूप और दीपक
  • नैवेद्य
  • मोदक या लड्डू
  • फल
  • पंचामृत की सामग्री

ऐसे करें गणपति की स्थापना

  • सबसे पहले पूजा स्थल पर चौकी रखकर उस पर कपड़ा बिछाएं। इसके बाद कलश स्थापित करें। कलश में जल भरकर उसमें आवश्यकता के अनुसार अक्षत और सुपारी आदि रखी जा सकती है।
  • कलश के ऊपर आम के पत्ते और नारियल रखने की परंपरा भी कई घरों में है।
  • इसके बाद श्रद्धापूर्वक गणेश जी की प्रतिमा को चौकी पर स्थापित करें। भगवान को पुष्प, दूर्वा, अक्षत और रोली अर्पित करें। दीपक और धूप जलाएं। इसके बाद गणेश जी का ध्यान करते हुए पूजा और संकल्प करें।
  • गणपति बप्पा को दूर्वा अर्पित करें और मोदक का भोग लगाएं। आप भोग में अन्य सात्विक प्रसाद भी चढ़ा सकते हैं।
  • भगवान गणेश की पूजा में दूर्वा और मोदक का विशेष महत्व माना जाता है। पूजा के दौरान गणेश जी को दूर्वा अर्पित करें और भोग में मोदक, लड्डू, फल या घर में बनाया हुआ सात्विक प्रसाद चढ़ा सकते हैं।इसके बाद धूप और दीप से आरती करें।

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गणेश जी की पूजा में करें मंत्र जाप

पूजा के दौरान भगवान गणेश के सरल मंत्र का जाप किया जा सकता है।‘ॐ गं गणपतये नमः’। इसके अलावा गणेश जी की आरती और परिवार की परंपरा के अनुसार अन्य स्तोत्र या मंत्रों का पाठ भी किया जा सकता है।रोजाना अपनी सुविधा के अनुसार गणेश जी की पूजा और आरती करें।

गणपति का विसर्जन

  • डेढ़ दिन बाद – स्थापना के अगले दिन विसर्जन।
  • 3 दिन बाद – तीसरे दिन विसर्जन।
  • 5 दिन बाद – पांचवें दिन विसर्जन।
  • 7 दिन बाद – सातवें दिन विसर्जन।
  • 10वें दिन – अनंत चतुर्दशी के दिन गणपति विसर्जन सबसे अधिक प्रचलित है।

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