Deep Dive with Abhinav Khare: क्या वापस आ रहा है सतयुग ?

Published : Sep 24, 2019, 10:48 PM ISTUpdated : Nov 18, 2019, 04:05 PM IST
Deep Dive with Abhinav Khare: क्या वापस आ रहा है सतयुग ?

सार

Deep Dive के इस वीडियो में अभिनव खरे शास्त्रों की गहराई में गोते लगाएंगे, जिसके अनुसार भारत में हो रही अशांति हमारे द्वापरयुग में प्रवेश का प्रतीक है। जहां ज्ञान, अध्यात्म और तपस्या लोगों के लिए सर्वोपरि होंगे और हम एक अपराध रहित दुनिया में जीवन यापन करेंगे।   

भारत की यह कहानी, सदियों से भी पुरानी है 
ज्ञान की ये गंगा, ऋषियों की अमर वाणी।

हमारे वेदों के अनुसार कुल चार युग होते हैं- सतयुग, त्रेतायुग, द्वापरयुग और कलयुग। कलयुग में परिवर्तन आएगा और हम फिर से सतयुग में प्रवेश कर जाएंगे। यह परिवर्तन प्रलय के जरिए आएगा और इस दौरान देश में बहुत ज्यादा अशांति होगी। जिसके बाद ऐसा कहा जा रहा है कि भारत में प्रलय शुरू हो चुका है। 

Deep Dive With Abhinav Khare

सतयुग जिसे कृता युग के नाम से भी जाना जाता है। इस युग के बारे में सबसे अच्छी बात यह थी कि उस समय कोई भी किसी भी तरह का अपराध नहीं  करता था। यह वह समय ता जब भगवान राज करते थे। ब्रम्हा सृष्टि का निर्माण करते थे, विष्णु संचालन करते थे और शिव संहार करते थे। पुराण के हिसाब से सतयुग 1,728,000 सालों तक चला। 

सतयुग में धर्म के सभी स्तंभ कायम थे। इस युग में ज्ञान, अध्यात्म और तपस्या सभी के लिए सर्वोपरि थे। लोग सिर्फ अच्छे काम करने में ही विश्वास करते थे। कोई किसी को अपशब्द नहीं कहता था, ना ही किसी पर आरोप लगाए जाते थे। उस समय लोगों के अंदर कोई घमंड, दुख, हिंसा, द्वेष, ईर्ष्या, भय, क्रोध या सुस्ती नहीं होती थी। इस युग में लोग कभी बीमार नहीं पड़ते थे। कहा जाता है कि सतयुग में लोगों की आयु लगभग 4000 साल हुआ करती थी। 

Abhinav Khare

सतयुग की सबसे बड़ी खासियत यह थी कि इस युग में कोई किसी भी तरह का अपराध नहीं करता था। आपने कभी सोचा है ऐसा क्यों था ? 

सतयुग सभी युगों से श्रेष्ठ था। इस युग में अमीर-गरीब का भेद नहीं होता था। सभी साथ मिलकर रहते थे। उस समय कोई बीमारी या कष्ट नहीं होता था। सभी की इच्छाएं स्वतः ही पूर्ण हो जाती थी और कोई लालच नहीं करता था। अध्यात्म के जरिए लोग अपने सपनों को हकीकत में बदल देते थे। अध्यात्म के जरिए लोग आत्म निरीक्षण करते थे। यह प्रक्रिया त्रेता युग में तपस्या और द्वापरयुग में यज्ञ या हवन के रूप में प्रचलित हुई।       

कलयुग में अध्यात्म को हम सब भूल चुके हैं। भगवत गीता में भी कहा गया है कि कलयुग में आत्म-निरीक्षण सिर्फ मूर्ति पूजा तक ही सीमित रह गया है। कहा जाता है कि अब सिर्फ धर्म का एक ही स्तंभ बचा है और वह भी लगातार बढ़ रहे अपराध, गरीबी और बीमारियों की वजह से खत्म हो जाएगा।

कौन हैं अभिनव खरे

अभिनव खरे एशियानेट न्यूज नेटवर्क के सीईओ हैं, वह डेली शो 'डीप डाइव विद अभिनव खरे' के होस्ट भी हैं। इस शो में वह अपने दर्शकों से सीधे रूबरू होते हैं। वह किताबें पढ़ने के शौकीन हैं। उनके पास किताबों और गैजेट्स का एक बड़ा कलेक्शन है। बहुत कम उम्र में दुनिया भर के 100 से भी ज्यादा शहरों की यात्रा कर चुके अभिनव टेक्नोलॉजी की गहरी समझ रखते है। वह टेक इंटरप्रेन्योर हैं लेकिन प्राचीन भारत की नीतियों, टेक्नोलॉजी, अर्थव्यवस्था और फिलॉसफी जैसे विषयों में चर्चा और शोध को लेकर उत्साहित रहते हैं। उन्हें प्राचीन भारत और उसकी नीतियों पर चर्चा करना पसंद है इसलिए वह एशियानेट पर भगवद् गीता के उपदेशों को लेकर एक सफल डेली शो कर चुके हैं।

अंग्रेजी, हिंदी, बांग्ला, कन्नड़ और तेलुगू भाषाओं में प्रासारित एशियानेट न्यूज नेटवर्क के सीईओ अभिनव ने अपनी पढ़ाई विदेश में की हैं। उन्होंने स्विटजरलैंड के शहर ज्यूरिख सिटी की यूनिवर्सिटी ETH से मास्टर ऑफ साइंस में इंजीनियरिंग की है। इसके अलावा लंदन बिजनेस स्कूल से फाइनेंस में एमबीए (MBA) भी किया है।
 

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