Dol Gyaras Kab Hai: डोल ग्यारस कब है, इसे क्यों कहते हैं परिवर्तिनी एकादशी? जानें सही डेट और महत्व

Published : Sep 20, 2026, 01:14 PM IST
Dol Gyaras Kab Hai

सार

Parivartini Ekadashi 2026: हिंदू धर्म में एकादशी तिथि का खास महत्व माना जाता है। साल में आने वाली सभी एकादशियों में भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को परिवर्तिनी एकादशी कहा जाता है। इसे डोल ग्यारस भी कहते हैं।

Dol Gyaras 2026 Date: भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी बहुत ही खास मानी गई है। इसे परिवर्तिनी एकादशी और डोस ग्यारस के नाम से जाना जाता है। मध्य प्रदेश और राजस्थान में इस दिन विशेष उत्सव मनाया जाता है। इस दिन भगवान विष्णु और श्रीकृष्ण की पूजा की जाती है। कई जगह मंदिरों से भगवान की सजी हुई पालकी निकाली जाती है और उन्हें जल विहार कराया जाता है। जानिए 2026 में डोल ग्यारस कब है…

कब है डोल ग्यारस 2026?

पंचांग के अनुसार, इस बार भाद्रपद शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 21 सितंबर की रात करीब 8 बजे शुरू होगी और 22 सितंबर की रात 9 बजकर 43 मिनट तक रहेगी। चूंकि एकादशी तिथि का सूर्योदय 22 सितंबर, मंगलवार को उदय होगा, इसलिए इसी दिन डोल ग्यारस का पर्व मनाया जाएगा। व्रत का पारण 23 सितंबर, बुधवार को किया जाएगा।

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डोल ग्यारस को परिवर्तिनी एकादशी क्यों कहते हैं?

धार्मिक मान्यता के अनुसार चातुर्मास के दौरान भगवान विष्णु क्षीरसागर में योग निद्रा में रहते हैं। भाद्रपद शुक्ल पक्ष की एकादशी पर भगवान विष्णु अपनी करवट बदलते हैं। इसी वजह से इस एकादशी को परिवर्तिनी एकादशी और पार्श्व एकादशी कहा जाता है। इसे वामन एकादशी और पद्मा एकादशी के नाम से भी जाना जाता है।

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डोल ग्यारस का महत्व

डोल ग्यारस नाम के पीछे एक खास परंपरा जुड़ी है। इस दिन कई जगहों पर भगवान विष्णु या श्रीकृष्ण की प्रतिमा को फूलों और कपड़ों से सजाकर डोल यानी पालकी में विराजमान किया जाता है। इसके बाद भक्त शोभायात्रा के साथ भगवान को नदी, तालाब या किसी अन्य जल स्रोत के पास ले जाते हैं। वहां पूजा-अर्चना और जल विहार की परंपरा निभाई जाती है। इसी वजह से इसे डोल ग्यारस और जलझूलनी एकादशी कहा जाता है।
मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु की पूजा और एकादशी व्रत करने से पुण्य की प्राप्ति होती है। भक्त सुबह स्नान करके भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करते हैं। भगवान को पीले फूल, तुलसी, फल और पंचामृत अर्पित किए जाते हैं। कई लोग इस दिन व्रत रखकर फलाहार करते हैं और एकादशी की कथा सुनते हैं।


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