
Dwijpriya Chaturthi Par Kab Niklega Chandrma: हर साल फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को संकष्टी चतुर्थी का व्रत किया जाता है। इसे द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी भी कहते हैं। इस व्रत में भगवान श्रीगणेश के साथ-साथ चंद्रमा की पूजा का भी विशेष महत्व है। इसलिए इस दिन महिलाओं को चंद्रोदय का इंतजार रहता है। व्रती (व्रत करने वाले) जानना चाहते हैं कि द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी पर चंद्रोदय का समय क्या है? आगे जानिए द्विजप्रिय संकष्टी पर चंद्रोदय का समय…
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उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. प्रवीण द्विवेदी के अनुसार, 5 फरवरी, गुरुवार को द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी पर चंद्रमा रात को लगभग 09 बजकर 35 मिनिट पर उदय होगा। अलग-अलग शहरों में चंद्रोदय के समय में थोड़ा परिवर्तन आ सकता है। चंद्रमा को देखने के बाद ही ये व्रत पूर्ण होगा।
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कईं बार ऐसे भी होता है कि आसमान में बादल होने के कारण आसमान में चंद्रमा दिखाई नहीं देता। ऐसी स्थिति में क्या करें? इसके बारे में धर्म ग्रंथों में बताया गया है। उसके अनुसार, चंद्रोदय के समय को कुछ देर बाद जिस दिशा में चंद्रोदय होता है, उस दिशा की ओर खड़े होकर सच्चे मन से चंद्रमा की मानसिक पूजा करें। ऐसा करने से भी आपको व्रत का पूरा फल मिल सकता है।
द्विजप्रिय चतुर्थी का व्रत बिना चंद्रमा की पूजा के पूरा नहीं होता। इसलिए सबसे पहले शुभ मुहूर्त में चंद्रमा की पूजा करें इसके बदा चंद्रोदय होने के इंतजार करें। जब चंद्रोदय हो जाए तो इसे शुद्ध जल से अर्घ्य दें और फूल, चावल व कुमकुम आदि चीजें चढ़ाएं। अगर मन में कोई इच्छा हो तो वह भी बोल सकते हैं।
धर्म ग्रंथों के अलावा ज्योतिष शास्त्र में भी चंद्रमा का विशेष महत्व है। चंद्रमा को मन का कारक माना गया है यानी हमारे मन में आने वाले अच्छे-बुरे विचारों का कारण चंद्रमा ही है। चंद्रमा नवग्रहों में से एक है और सबसे तेजी से यही राशि बदलता है। चंद्रमा किसी भी राशि में लगभग ढाई दिन ही रहता है। चंद्रमा अलग-अलग ग्रहों के साथ मिलकर कईं शुभ-अशुभ योग भी बनाता है।
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