Maha Shivaratri 2026: शिवरात्रि और महाशिवरात्रि एक है या अलग-अलग? जानें फैक्ट

Published : Feb 03, 2026, 01:53 PM IST
Maha Shivaratri 2026

सार

Maha Shivaratri 2026: हिंदू धर्म में भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए अनेक व्रत-त्योहार मनाए जाते हैं। महाशिवरात्रि इनमें सबसे प्रमुख है। इसके अलावा मासिक शिवरात्रि का पर्व भी मनाया जाता है। आगे जानिए मासिक शिवरात्रि और महाशिवरात्रि में क्या अंतर है?

Maha Shivaratri 2026 Date: भगवान शिव हिंदुओं के सबसे बड़े देवता हैं। इनकी कृपा पाने के लिए अनेक व्रत-त्योहार मनाए जाते हैं जैसे प्रदोष व्रत, शिव चतुर्दशी, महाशिवरात्रि और शिवरात्रि आदि। बहुत से लोग शिवरात्रि और महाशिवरात्रि को एक ही समझते हैं जबकि ऐसा नहीं है। इन दोनों व्रतों में बहुत अंतर है। महाशिवरात्रि पर्व साल में सिर्फ एक ही बार मनाया जाता है जबकि शिवरात्रि पर्व साल में 12 बार। आगे जानिए इन दोनों व्रतों में क्या अंतर है…

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कब मनाते हैं महाशिवरात्रि?

धर्म ग्रंथों के अनुसार, महाशिवरात्रि का पर्व साल में एक बार ही बार फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है। मान्यता है कि इसी तिथि पर महादेव सर्वप्रथम लिंग रूप में प्रकट हुए थे। इसी रूप में उन्होंने भगवान विष्णु और ब्रह्मदेव की परीक्षा ली थी। तभी से इस तिथि पर हर साल महाशिवरात्रि का पर्व मनाया जाता है। इस बार महाशिवरात्रि का पर्व 15 फरवरी, रविवार को मनाया जाएगा।

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कब मनाते हैं शिवरात्रि?

शिवरात्रि पर्व हर महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है। इसलिए इसे मासिक शिवरात्रि भी कहते हैं। इस व्रत का एक और नाम शिव चतुर्दशी भी प्रसिद्ध है। इस तरह शिवरात्रि का पर्व साल में 12 बार और महाशिवरात्रि पर्व साल में सिर्फ 1 ही बार मनाया जाता है। इसी वजह से महाशिवरात्रि का महत्व शिवरात्रि से अधिक माना गया है।

रात में ही क्यों करते हैं पूजा?

मासिक शिवरात्रि और महाशिवरात्रि में महादेव की पूजा रात में करने की परंपरा है क्योंकि महादेव ने लिंग रूप में अवतार रात्रि में ही लिया था। इन दोनों व्रतों में रात के चारों पहर में शिवजी की पूजा की जाती है और अगले दिन इन व्रतों का पारणा किया जाता है। इन व्रतों से संबंधित और भी कईं नियम हैं जो इन्हें खास बनाते हैं।

क्या महाशिवरात्रि पर हुआ था शिव-पार्वती का विवाह?

बहुत से लोग ये मानते हैं कि भगवान शिव-पार्वती का विवाह फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी तिथि पर हुआ था, इसलिए महाशिवरात्रि का पर्व मनाया जाता है लेकिन शिव पुराण में ऐसी कोई वर्णन नहीं मिलता। ये सिर्फ एक मान्यता है। कुछ विद्वानों का ये भी मानना है कि इसी दिन 12 ज्योतिर्लिंग प्रकट हुए थे।


Disclaimer
इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।

 

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