
Ganesh Chaturthi 2026 Shubh Muhurat: हर साल भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को गणेश चतुर्थी मनाई जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इसी तिथि पर भगवान श्रीगणेश का प्राकट्य हुआ था। इसलिए इस दिन गणपति की पूजा और प्रतिमा स्थापना का विशेष महत्व माना जाता है। गणेश प्रतिमा की स्थापना किस तरह करनी चाहिए और पूजा में कौन-सा मंत्र बोलना शुभ माना जाता है, आइए जानते हैं उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. प्रवीण द्विवेदी से…
सुबह 06:24 से 07:52 तक
सुबह 09:20 से 10:48 तक
दोपहर 11:53 से 12:39 तक (अभिजीत मुहूर्त)
दोपहर 01:44 से शाम 06:08 तक
शाम 05:04 से 06:31 तक (कुंभ स्थिर लग्न)
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दोपहर 11:53 से 12:39 तक (अभिजीत मुहूर्त)
शाम 05:04 से 06:31 तक (कुंभ स्थिर लग्न)
सुबह 10:58 से 01:17 तक (वृश्चिक स्थिर लग्न)
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दोपहर 11:53 से 12:39 तक (अभिजीत मुहूर्त)
दोपहर 01:44 से शाम 06:08 तक
शाम 05:04 से 06:31 तक (कुंभ स्थिर लग्न)
- गणेश चतुर्थी के दिन सुबह स्नान करने के बाद पूजा का संकल्प लें। इसके लिए हाथ में जल, चावल और फूल लेकर भगवान गणेश का ध्यान करें। जिस जगह प्रतिमा स्थापित करनी हो, उस स्थान की अच्छी तरह सफाई करें और गंगाजल या गौमूत्र का छिड़काव करके उसे पवित्र करें।
- अब शुभ मुहूर्त में एक साफ लकड़ी की चौकी रखें और उसके ऊपर लाल कपड़ा बिछाएं। इसी चौकी पर भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करें। गणपति को कुमकुम का तिलक लगाएं और फूलों की माला पहनाएं।
- इसके बाद भगवान के सामने शुद्ध घी का दीपक जलाएं। पूजा में हल्दी, रोली, इत्र, पान, इलायची, लौंग, अबीर और गुलाल जैसी सामग्री अर्पित करें। भगवान गणेश को हल्दी लगी दूर्वा विशेष रूप से चढ़ाएं।
- पूजा के दौरान ऊं गं गणपतये नमः मंत्र का जाप करें। इसके बाद भगवान गणेश को मोदक, बूंदी के लड्डू और मौसमी फलों का भोग लगाएं। पूजा पूरी होने के बाद गणेशजी की आरती करें और कुछ समय तक मंत्र जाप या ध्यान करें।
- गणेश उत्सव के 10 दिनों तक प्रतिमा की नियमित पूजा करें। सुबह और शाम आरती व भोग लगाएं। इस दौरान ध्यान रखें कि गणेश प्रतिमा को बार-बार इधर-उधर न किया जाए और उसे उसी स्थान पर रखा जाए, जहां स्थापना की गई है।
जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा।
माता जाकि पार्वती पिता महादेवा।।
जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा।
एक दन्त दयावंत चार भुजा धारी।
माथे सिंदूर सोहे मूसे की सवारी।।
जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा।
अन्धन को आंख देत कोढिऩ को काया।
बांझन को पुत्र देत निर्धन को माया।।
जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा।
हार चढ़े फुल चढ़े और चढ़े मेवा।
लड्डूवन का भोग लगे संत करे सेवा।।
जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा।
दीनन की लाज रखो, शंभू पुत्र वारी।
मनोरथ को पूरा करो, जय बलिहारी।।
जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा।
माता जाकि पार्वती पिता महादेवा।।
पौराणिक कथा के अनुसार, माता पार्वती ने मिट्टी से एक बालक बनाया और उसमें प्राण डालकर उसे अपना पुत्र माना। उनका नाम गणेश रखा गया। एक बार माता पार्वती स्नान करने गईं और गणेशजी को द्वार पर पहरा देने के लिए कहा। इसी दौरान भगवान शिव वहां पहुंचे। गणेशजी ने माता की आज्ञा का पालन करते हुए उन्हें अंदर जाने से रोक दिया। इससे क्रोधित होकर महादेव ने उनका मस्तक काट दिया। माता पार्वती के दुखी होने पर भगवान शिव ने गणेशजी को हाथी का सिर लगाकर दोबारा जीवित कर दिया। इसके बाद सभी देवी-देवताओं ने गणेशजी को प्रथम पूज्य होने का आशीर्वाद दिया। तभी से किसी भी शुभ काम से पहले भगवान गणेश की पूजा करने की परंपरा चली आ रही है।
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