Govind Dwadashi 2026: गोविंद द्वादशी 28 फरवरी को, जानें व्रत विधि, मंत्र और शुभ मुहूर्त

Published : Feb 27, 2026, 10:40 AM IST
Govind Dwadashi 2026

सार

Govind Dwadashi 2026 Date: होली से पहले आने वाली द्वादशी तिथि को गोविंद द्वादशी के नाम से जाना जाता है। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण के गोविंद स्वरूप की पूजा की जाती है। इसे नृसिंह द्वादशी, सुकृत द्वादशी और मनोरथ द्वादशी के नाम से भी जाना जाता है।

Govind Dwadashi 2026 Kab Hai: धर्म ग्रंथों के अनुसार फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि को गोविंद द्वादशी कहा जाता है। गो का अर्थ है गाय और विन्द का अर्थ है रक्षक, यानी गाय अथवा पृथ्वी के रक्षक। नारदपुराण एवं भविष्यपुराण क अनुसार गोविंद द्वादशी पर भगवान श्रीकृष्ण के गोविन्द स्वरूप का पूजन करना चाहिये। यानी जिस रूप में भगवान श्रीकृष्ण के साथ गायों के साथ दिखाई देते हैं। इस बार गोविंद द्वादशी का व्रत 28 फरवरी, शनिवार को मनाया जाएगा। आगे जानिए इस व्रत की पूजा विधि, शुभ मुहूर्त और मंत्र सहित पूरी डिटेल…

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गोविंद द्वादशी 2026 पूजा मुहूर्त

सुबह 08:19 से 09:46 तक
दोपहर 12:16 से 01:02 तक (अभिजीत मुहूर्त)
दोपहर 12:39 से 02:05 तक
दोपहर 03:32 से 04:59 तक

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गोविंद द्वादशी व्रत-पूजा विधि

- 28 फरवरी, शनिवार की सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करने के बाद हाथ में जल, चावल और फूल लेकर व्रत-पूजा का संकल्प लें।
- ऊपर बताए गए शुभ मुहूर्त में भगवान गोविंद की पूजा शुरू करें। सबसे पहले भगवान के चित्र के सामने शुद्ध घी का दीपक जलाएं।
- भगवान को फूलों का हार पहनाएं और कुमकुम से तिलक लगाएं। इसके बाद चावल, रोली, अबीर, गुलाल, जनेऊ आदि चीजें भी अर्पित करें।
- पूजा करते समय गोविन्दाय नमस्तुभ्यम् मंत्र का जाप निरंतर करते हैं। अपनी इच्छा के अनुसार भोग लगाएं और आरती करें।
- पूजा के बाद तिल में घी मिलाकर एक सौ आठ आहुतियों द्वारा हवन करें। दिन भर व्रत के नियमों का पालन करें। रात में सोएं नहीं, भजन-कीर्तन करें।
- अगले दिन यानी 1 मार्च, रविवार की सुबह ब्राह्मणों को भोजन, कपड़ों व अनाज आदि का दान करते हुए ये मंत्र बोलें-
नमो गोविन्द सर्वेश गोपिकाजनवल्लभ।
अनेन धान्यदानेन प्रीतो भव जगद्गुरो॥
अर्थ- हे गोविन्द, हे समस्त चराचर जगत के गुरु! मेरे द्वारा किये गये इस धान्य के दान से आप मुझ पर प्रसन्न हों।
- इस प्रकार गोविंद द्वादशी के व्रत का विधि-विधान से करने से से मनुष्य समस्त पापों से मुक्त हो जाता है तथा परेशानियों से मुक्ति भी मिलती है।

भगवान विष्णु की आरती लिरिक्स हिंदी में

ऊं जय जगदीश हरे, स्वामी! जय जगदीश हरे।
भक्तजनों के संकट क्षण में दूर करे॥
जो ध्यावै फल पावै, दुख बिनसे मन का।
सुख-संपत्ति घर आवै, कष्ट मिटे तन का॥ ऊं जय...॥
मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूं किसकी।
तुम बिन और न दूजा, आस करूं जिसकी॥ ऊं जय...॥
तुम पूरन परमात्मा, तुम अंतरयामी॥
पारब्रह्म परेमश्वर, तुम सबके स्वामी॥ ऊं जय...॥
तुम करुणा के सागर तुम पालनकर्ता।
मैं मूरख खल कामी, कृपा करो भर्ता॥ ऊं जय...॥
तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति।
किस विधि मिलूं दयामय! तुमको मैं कुमति॥ ऊं जय...॥
दीनबंधु दुखहर्ता, तुम ठाकुर मेरे।
अपने हाथ उठाओ, द्वार पड़ा तेरे॥ ऊं जय...॥
विषय विकार मिटाओ, पाप हरो देवा।
श्रद्धा-भक्ति बढ़ाओ, संतन की सेवा॥ ॐ जय...॥
तन-मन-धन और संपत्ति, सब कुछ है तेरा।
तेरा तुझको अर्पण क्या लागे मेरा॥ ऊं जय...॥
जगदीश्वरजी की आरती जो कोई नर गावे।
कहत शिवानंद स्वामी, मनवांछित फल पावे॥ ऊं जय...॥



Disclaimer
इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।

 

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