भगवान जगन्नाथ की प्रसिद्ध रथयात्रा 16 जुलाई को ओडिसा के पुरी में शुरू हो चुकी है। इस रथयात्रा से जुड़े अनेक रोचक फैक्ट हैं जिनके बारे में कम ही लोगों को पता है।
ओडिसा के पुरी में भगवान जगन्नाथ का प्रसिद्ध मंदिर है। ये हिंदुओं के 4 पवित्र धामों में से एक है। यहा हर साल आषाढ़ मास में रथयात्रा निकाली जाती है। इस रथयात्रा के दौरान भगवान जगन्नाथ रथ में सवार होकर भक्तों को दर्शन देने निकलते हैं। इस रथयात्रा को देखने के लिए दूर-दूर से भक्त यहां आते हैं। इस बार जगन्नाथ रथयात्रा 16 जुलाई से शुरू हो चुकी है। रथयात्रा के दौरान भगवान जगन्नाथ एक मंदिर में 7 दिनों तक आराम करते हैं, इसे उनकी मौसी का घर कहते हैं। आगे जानिए कौन-सा है वो मंदिर और उससे जुड़ी रोचक बातें…
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कहां है भगवान जगन्नाथ की मौसी का घर?
भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा 3 किमी दूर गुंडिचा मंदिर तक जाती है और यहीं पर भगवान अपने भाई बलभद्र और बहन सुभद्र के साथ 7 दिनों तक आराम करते हैं। इसी गुंडिचा मंदिर को भगवान जगन्नाथ की मौसी का घर कहते हैं। 7 दिनों तक यहां रोज भगवान को विशेष प्रकार का भोग लगाया जाता है, जिसे पोडा पीठा कहते हैं। गुंडिचा मंदिर को वृंदावन का स्वरूप भी कहते हैं।
धर्म ग्रंथों के अनुसार पुरी के राजा इंद्रद्युम्न की पत्नी का नाम गुंडिचा था। राजा इंद्रद्युम्न की तरह रानी गुंडिचा भी भगवान जगन्नाथ की परम भक्त थी। ऐसी मान्यता है कि राजा इंद्रद्युम्न ने ही पुरी में भगवान जगन्नाथ का मंदिर बनवाया और रथयात्रा की परंपरा शुरू की। रानी गुंडिचा की इच्छा थी कि भगवान कुछ दिन उनके घर में आकर वास करें। इसलिए रानी गुंडिचा के नाम पर एक मंदिर बनाया गया और तब से रथयात्रा के दौरान भगवान जगन्नाथ 7 दिनों तक यहीं आराम करते हैं।
मान्यता है कि भगवान जगन्नाथ की प्रतिमा का निर्माण सबसे पहले देवशिल्पी विश्वकर्मा ने उसी स्थान पर किया था, जहां आज गुंडिचा मंदिर बना है। इसलिए इस मंदिर को भगवान जगन्नाथ की जन्मस्थली भी कहा जाता है। रानी गुंडिचा भगवान जगन्नाथ को पुत्र के समान स्नेह भी करती थी। इसलिए उनके नाम पर बने मंदिर को भगवान जगन्नाथ की मौसी का घर कहा जाता है।
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