
Janmashtami Mantra Puja Time: जन्माष्टमी हिंदुओं के प्रमुख त्योहारों में से एक है। हर साल ये त्योहार पूरे देश में बहुत ही धूम-धाम, उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण का जन्म अर्ध रात्रि में हुआ था। इसलिए रात के समय ही भगवान श्रीकृष्ण की विशेष पूजा की जाती है। आगे जानें इस बार पूजा का शुभ मुहूर्त कब से कब है और पूजा की विधि व मंत्रों की डिटेल…
जन्माष्टमी पर रात में भगवान श्रीकृष्ण की पूजा का विशेष महत्व धर्म ग्रंथों में बताया गया है। बहुत से स्थानों पर विधिवत रूप से श्रीकृष्ण जन्म की रस्में भी निभाई जाती हैं। इस बार रात्रि में पूजा का शुभ मुहूर्त रात 11 बजकर 57 मिनिट से 12 बजकर 43 मिनिट तक रहेगा यानी भक्तों को पूजा के लिए 45 मिनिट का समय मिलेगा।
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- मुहूर्त शुरू होने से पहले सुंदर पालना सजाएं और उसमें लड्डू गोपाल की प्रतिमा स्थापित करें। शुभ मुहूर्त होने पर पूजा शुरू करें।
- सबसे पहले लड्डू गोपाल को तिलक लगाकर फूल, इत्र, अबीर-गुलाल, नारियल और फल अर्पित करें। घी का दीपक जलाएं।
- पूजा करते समय ऊं नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जाप करें। इसके बाद कान्हा को भोग लगाएं और भोग में तुलसी की पत्ती जरूर रखें।
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- परिवार के साथ भगवान श्रीकृष्ण की आरती करें और कान्हा को झूला झुलाएं। संभव हो तो कुछ देर भजन-कीर्तन भी करें।
- इस तरह आसान विधि से पूजा करके भी आप जन्माष्टमी व्रत का पूजा फल पा सकते हैं। व्रत के अगले दिन पारण जरूर करें
1. भगवान श्रीकृष्ण की पूजा में मोर पंख चढ़ाने से जीवन में सुख-शांति बनी रहती है।
2. कान्हा को बांसुरी भी अतिप्रिय है। जन्माष्टमी की रात कान्हा को बांसुरी अर्पित करना बहुत शुभ माना गया है।
3. वैसे तो आप श्रीकृष्ण को कोई भी भोग लगा सकते हैं लेकिन जन्माष्टमी पर माखन-मिश्री, पंजीरी और पंचामृत का भोग जरूर लगाएं।
4. अगर आप धन लाभ चाहते हैं तो भगवान श्रीकृष्ण की पूजा में दक्षिणावर्ती शंख भी चढ़ाएं।
5. भगवान श्रीकृष्ण का एक नाम पीतंबर धारी भी है, इसलिए पीले वस्त्र कान्हा को अर्पित करें।
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