
Jaya Ekadashi Vrat Katha In Hindi: धर्म ग्रंथों के अनुसार, माघ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को जया एकादशी कहते हैं। कुछ पुराणों में इसे अजा और भीष्म एकादशी भी बताया गया है। इस एकादशी का महत्व स्वयं भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को बताया है। साथ ही इससे जुड़ी कथा भी स्वयं श्रीकृष्ण ने ही सुनाई है। उसके अनुसार, जया एकादशी के व्रत से सभी पापों से मुक्ति मिल जाती है। जो व्यक्ति ये व्रत करता है समझो उसने सभी तप, यज्ञ, दान कर लिये हैं। आगे पढ़ें जया एकादशी व्रत की कथा…
प्रचलित कथा के अनुसार ‘एक बार देवराज इंद्र नंदन वन में घूम रहे थे। उस समय गंधर्व गा रहे थे और कन्याएं नृत्य कर रही थीं। वहां पुष्पवती नाम की एक गन्धर्व कन्या भी थी जो माल्यवान नाम के गन्धर्व को देखकर उस पर मोहित हो गई। जिसके कारण उसके नृत्य में ताल की कमी हो गई। ये देख देवराज इंद्र पुष्पवती और माल्यवान को पृथ्वी पर जाने का श्राप दे दिया।
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श्राप के कारण वे दोनों हिमालय पर पिशाच योनि में रहकर जीवन बिताने लगे। वो स्थान बहुत ही दुर्गम था, जिसके कारण वहां रहना आसान नहीं था। एक बार माघ शुक्ल पक्ष की एकादशी पर दोनों ने किसी कारण भोजन नहीं किया और न ही कोई पाप किया। भूख से व्याकुल होकर वे पीपल के नीचे बैठे रहे। पूरी रात भी उन्होंने पीपल के वृक्ष के नीचे ही व्यतीत की।
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इस व्रत के प्रभाव से अगले दिन वे दोनों पिशाच योनि से मुक्त होकर सुंदर शरीर धारण कर पुन: स्वर्ग को चले गए। देवराज इंद्र ने उनका स्वागत किया और उनके पिशाच योनि में जाने की पूरी कथा भी सुनाई। उसे सुनकर दोनों ने भगवान विष्णु और जया एकादशी के व्रत को प्रणाम किया। साथ ही उन्होंने प्रत्येक एकादशी तिथि पर व्रत करने का संकल्प भी लिया।
जो व्यक्ति जया एकादशी का व्रत करता है, उसे इसका पूरा फल तब तक नहीं मिलता, जब तक वो ये कथा न सुन लें। इसलिए व्रती (व्रत करने वाला) को जया एकादशी से जुड़ी ये रोचक कथा जरूर सुननी चाहिए।
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