Pradosh Vrat Kab Hai: 15 या 16 अप्रैल, कब करें प्रदोष व्रत? पूजा विधि-मंत्र, मुहूर्त जानें पूरी डिटेल

Published : Apr 14, 2026, 09:30 AM IST

Pradosh Vrat April 2026: अप्रैल 2026 के दूसरे सप्ताह में प्रदोष व्रत का संयोग बन रहा है। ये प्रदोष व्रत कब करें 30 या 31 को, इसे लेकर लोगों के मन में कन्फ्यजून की स्थिति बन रही है। जानें क्या है प्रदोष व्रत की सही डेट।

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अप्रैल 2026 में कब करें प्रदोष व्रत?

Budh Pradosh Vrat April 2026 Shubh Muhurat: अप्रैल 2026 के तीसरे सप्ताह में प्रदोष का शुभ संयोग बन रहा है। ये व्रत 15 अप्रैल को करें या 16 को, इसे लेकर लोगों के मन में संकोच है। कुछ पंचांगों में भी इस प्रदोष व्रत को लेकर अलग-अलग डेट बताई गई हैं। खास बात ये भी है कि प्रदोष व्रत के साथ ही मासिक शिवरात्र का व्रत भी एक ही दिन किया जाएगा। आगे जानिए अप्रैल 2026 में पहले प्रदोष व्रत की सही डेट क्या है, साथ ही पूजा विधि, मंत्र सहित पूरी डिटेल…


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15 या 16 अप्रैल, कब करें प्रदोष व्रत?

पंचांग के अनुसार वैशाख मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 14 अप्रैल, मंगलवार की रात 12 बजकर 12 मिनिट से शुरू होगी जो अगले दिन यानी 15 अप्रैल, बुधवार की रात 10 बजकर 31 मिनिट तक रहेगी। चूंकि प्रदोष व्रत में भगवान शिव की पूजा शाम को की जाती है और ये स्थिति 15 अप्रैल, बुधवार को बन रही है तो इसी दिन ये व्रत किया जाएगा। बुधवार को प्रदोष व्रत होने से ये बुध प्रदोष कहलाएगा।


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15 अप्रैल 2026 प्रदोष व्रत पूजा शुभ मुहूर्त

उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. प्रवीण द्विवेदी के अनुसार 15 अप्रैल, बुधवार को प्रदोष व्रत की पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 06 बजकर 47 मिनिट से शुरू होगा जो रात 09 बजे तक रहेगा। यानी भक्तों को पूजा के लिए पूरे 02 घण्टे 14 मिनट का समय मिलेगा। इस दिन ब्रह्म, इंद्र और पद्म नाम के 3 शुभ योग भी बनेंगे, जिसके चलते इस व्रत का महत्व और भी अधिक माना जाएगा।

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इस विधि से करें बुध प्रदोष व्रत-पूजा

15 अप्रैल, बुधवार की सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करें और इसके बाद हाथ में जल, चावल व फूल लेकर व्रत-पूजा का संकल्प लें। दिन भर व्रत के नियमों का पालन करें यानी भोजन न करें। किसी से झूठ न बोलें और न ही किसी पर क्रोध करें। शुभ मुहूर्त से पहले पूजन सामग्री एक स्थान पर इकट्‌ठा कर लें।
शुभ मुहूर्त शुरू होने पर सबसे पहले शिवलिंग का अभिषेक जल से, फिर गाय के दूध से और फिर शुद्ध जल से करें। इसके बाद एक-एक करके फूल, धतूरा और बिल्व पत्र आदि चीजें एक-एक करके महादेव को अर्पित करें। पूजा करते समय ऊं नम: शिवाय मंत्र का जाप भी लगातार मन ही मन में करते रहें।
अपनी इच्छा के अनुसार भोग लगाकर भगवान महादेव की परिवार सहित आरती करें। पूजा के बाद अपनी जरूरतमंदों को दान भी आप कर सकते हैं। इसके बाद सात्विक भोजन करें। रात में ब्रह्मचर्य का पालन करें। इस प्रकार जो व्यक्ति पूरी श्रद्धा से प्रदोष व्रत करता है, उसकी सभी मनोकामना पूरी होती है।

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शिवजी की आरती लिरिक्स हिंदी में

ऊं जय शिव ओंकारा,स्वामी जय शिव ओंकारा।
ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव,अर्द्धांगी धारा॥
ऊं जय शिव ओंकारा॥
एकानन चतुराननपञ्चानन राजे।
हंसासन गरूड़ासनवृषवाहन साजे॥
ऊं जय शिव ओंकारा॥
दो भुज चार चतुर्भुजदसभुज अति सोहे।
त्रिगुण रूप निरखतेत्रिभुवन जन मोहे॥
ऊं जय शिव ओंकारा॥
अक्षमाला वनमालामुण्डमाला धारी।
त्रिपुरारी कंसारीकर माला धारी॥
ऊं जय शिव ओंकारा॥
श्वेताम्बर पीताम्बरबाघम्बर अंगे।
सनकादिक गरुणादिकभूतादिक संगे॥
ऊं जय शिव ओंकारा॥
कर के मध्य कमण्डलुचक्र त्रिशूलधारी।
सुखकारी दुखहारीजगपालन कारी॥
ऊं जय शिव ओंकारा॥
ब्रह्मा विष्णु सदाशिवजानत अविवेका।
प्रणवाक्षर मध्येये तीनों एका॥
ऊं जय शिव ओंकारा॥
लक्ष्मी व सावित्रीपार्वती संगा।
पार्वती अर्द्धांगी,शिवलहरी गंगा॥
ऊं जय शिव ओंकारा॥
पर्वत सोहैं पार्वती,शंकर कैलासा।
भांग धतूर का भोजन,भस्मी में वासा॥
ऊं जय शिव ओंकारा॥
जटा में गंगा बहत है,गल मुण्डन माला।
शेष नाग लिपटावत,ओढ़त मृगछाला॥
ऊं जय शिव ओंकारा॥
काशी में विराजे विश्वनाथ,नन्दी ब्रह्मचारी।
नित उठ दर्शन पावत,महिमा अति भारी॥
ऊं जय शिव ओंकारा॥
त्रिगुणस्वामी जी की आरतीजो कोइ नर गावे।
कहत शिवानन्द स्वामी,मनवान्छित फल पावे॥
ऊं जय शिव ओंकारा॥


Disclaimer
इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।

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