Ekadashi Vrat Me Kya Khana Chahiye: हिंदू धर्म में व्रत-उपवास के दौरान साबूदाना से बनी चीजें विशेष रूप से खाई जाती हैं जैसे खिचड़ी, खीर और टिक्की आदि। व्रत में साबूदाना खाना चाहिए या नहीं? इसे लेकर भी विद्वानों के अलग-अलग विचार हैं।

Ekadashi Mein Kya Kya Kha Sakte Hain: हिंदू धर्म में अनेक व्रत-उपवास बताए गए हैं। इनमें से कुछ व्रत-उपवास तो निर्जला होते हैं यानी जिनमें कुछ भी खाने-पीने की मनाही होती है लेकिन अन्य व्रतों में एक समय फलाहार करने की अनुमति होती है। वर्तमान में व्रत के दौरान सबसे ज्यादा साबूदाने से बनी चीजें जैसे खिचड़ी, खीर आदि खाने की परंपरा है। लेकिन कुछ विद्वान साबूदाने को व्रत-उपवास में खाने योग्य नहीं मानते। आगे जानिए व्रत-उपवास में साबूदाना खाना सही है या गलत?

ये भी पढ़ें-
Akshaya Tritiya 2026: अक्षय तृतीया क्यों है इतनी शुभ? बहुत कम लोग जानते हैं ये 4 वजह

क्या है साबूदाना?

अधिकांश लोग व्रत-उपवास में साबूदाना खाते हैं लेकिन उन्हें ये भी पता नहीं होता है कि आखिर ये बना किससे है? दरअसल साबूदाना कसावा नाम के पौधे से मिलने वाला एक स्टार्च है। चूंकि कसावा जमीन के नीचे उगता है इसलिए इसे कंद कहा जाता है। धर्म ग्रंथों के अनुसार उपवास के दौरान कंद खाया जा सकता है। इसी वजह से साबूदाने को फलाहारी माना जाता है। इसमें भरपूर मात्रा में कार्बोहाइड्रेट होता है, जो व्रत के दौरान शरीर को ऊर्जा प्रदान करता है।

ये भी पढ़ें-
एकादशी के दिन तुलसी पर जल चढ़ाएं या नहीं, क्या हैं नियम? गांठ बांध लें ये 10 बातें

कैसे बनता है साबूदाना?

कसावा के पेड़ की जड़ को टैपिओका रूट कहते हैं। इस जड़ से सफेद रंग का गूदा निकलता है। इस गूदे को इकट्ठा कर लंबे समय तक सड़ाया जाता है। इसके बाद इसमें केमिकल इसका आटा तैयार किया जाता है। इसी आटे को मशीनों में डालकर छोटे-छोटे दानों में अर्थात साबूदाने के रूप में तैयार किया जाता है और फिर इस पर पॉलिश की जाती है, जिससे कि ये सफेद दिखाई देता है। इस तरह कईं महीनों की प्रोसेस के बाद साबूदाना तैयार होता है।

साबूदाना व्रत-उपवास में खाना सही या गलत?

साबूदाने को व्रत-उपवास में खाने को लेकर विद्वानों के अलग-अलग मत हैं। कुछ विद्वानों का कहना है कि कंद को उपवास में खाया जा सकता है और साबूदाना भी कंद से ही बनता है, इसलिए इसे व्रत-उपवास में खाना सही है। जबकि कुछ विद्वानों का मत है कि साबूदाने को बनाने की प्रक्रिया में अनेक सूक्ष्म जीव-जंतुओं की मृत्यु हो जाती है। इसलिए इसका उपयोग व्रत के दौरान नहीं करना चाहिए। वृंदावन में स्थित मलूक पीठ के पीठाधीश्वर श्रीराजेंद्रदास जी महाराज का भी कहना है कि व्रत के दौरान साबूदाना नहीं खाना चाहिए।


Disclaimer
इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।