
Sheetala Puja 2025 Details: हर साल चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि को देवी शीतला की पूजा की जाती है। इस पर्व को शीतला सप्तमी के नाम से जाना जाता है। देवी शीतला माता पार्वती का ही एक रूप है। इनकी पूजा में शीतल चीजों का उपयोग किया जाता है जैसे जल और ठंडा भोजन आदि। इसलिए शीतला सप्तमी पर इनके भक्त भी ठंडा भोजन ही करते हैं। आगे जानिए इस बार कब है शीतला सप्तमी और इसका महत्व…
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पंचांग के अनुसार, इस बार चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि 09 मार्च, सोमवार की रात 11 बजकर 27 मिनिट से शुरू होगी जो 10 मार्च, बुधवार की रात 01 बजकर 54 मिनिट तक रहेगी। चूंकि सप्तमी तिथि का सूर्योदय 10 मार्च को होगा और पूरे दिन भी यही तिथि रहेगी, इसलिए इसी दिन शीतला सप्तमी का पर्व मनाया जाएगा। इस दिन मित्र, मानस, हर्षण और सर्वार्थसिद्धि योग रहेगा जिससे इसका पर्व का महत्व और भी बढ़ जाएगा।
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धर्म ग्रंथों में देवी शीतला को शीतलता की देवी कहा गया है। चैत्र मास के दौरान शीत और ग्रीष्म ऋतु के संधि काल में मौसमजनित बीमारियां होने का अंदेशा रहता है। इसी से बचने के लिए देवी शीतला की पूजा की जाती है और ठंडा भोजन किया जाता है। जो ये बताता है कि ग्रीष्म ऋतु में हमें ठंडी चीजों का सेवन अधिक करना चाहिए, जिससे कि पेट के रोगों से भी बचा जा सके।
शीतला सप्तमी का पर्व अपने अंदर कईं महत्व समेटे हुए है। शीतला सप्तमी का पर्व हमें बताता है कि ग्रीष्म ऋतु शुरू होने वाली है। इस मौसम में होने वाले रोगों से बचने के लिए हमें अपने खान-पान में बदलाव शुरू कर देना चाहिए। देवी शीतला का वाहन गधा है, जो ये संदेश देता है कि संसार का हर प्राणी समान है। सनातन धर्म में सभी का सम्मान है।
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