Varuthini Ekadashi 2026: 12 या 13 अप्रैल, कब है वरुथिनी एकादशी? जानें मंत्र-पूजा विधि और मुहूर्त

Published : Apr 11, 2026, 02:48 PM IST
Varuthini Ekadashi 2026

सार

Varuthini Ekadashi 2026: इस बार वरुथिनी एकादशी का व्रत अप्रैल 2026 में किया जाएगा। इस व्रत का महत्व अनेक धर्म ग्रंथों में बताया गया है। इस व्रत को करने से जीवन भर के पापों का नाश हो जाता है, ऐसी मान्यता है।

Varuthini Ekadashi 2026: धर्म ग्रंथों में एकादश तिथि का विशेष महत्व बताया गया है। एक साल में कुल 24 एकादशी होती है। अधिक मास होने पर इनकी संख्या 26 हो जाती है। इनमें से वैशाख मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को वरुथिनी एकादशी कहते हैं। ऐसी मान्यता है कि इस एकादशी का व्रत करने से सभी पापों का स्वत: ही नाश हो जाता है। आगे जानिए कब है वरुथिनी एकादशी व्रत, इसकी पूजा विधि-मंत्र और शुभ मुहूर्त…

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कब करें वरुथिनी एकादशी व्रत 2025?

पंचांग के अनुसार, पंचांग के अनुसार वैशाख मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 12 अप्रैल, रविवार की रात 01 बजकर 16 मिनिट से शुरू होगी जो 13 अप्रैल, सोमवार की रात 01 बजकर 08 मिनिट तक रहेगी। चूंकि एकादशी तिथि का सूर्योदय 13 अप्रैल को होगा, इसलिए इस दिन वरुथिनी एकादशी का व्रत किया जाएगा। इस दिन शुभ, अमृत और शुक्ल नाम के 3 शुभ योग भी बनेंगे, जिसके चलते इस व्रत का महत्व और भी अधिक हो गया है।

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वरुथिनी एकादशी 2026 शुभ मुहूर्त

- सुबह 06:11 से 07:45 तक
- सुबह 09:19 से 10:53 तक
- दोपहर 12:02 से 12:52 तक
- दोपहर 02:01 से 03:35 तक
- शाम 05:09 से 06:42 तक

वरुथिनी एकादशी व्रत-पूजा विधि

- वरुथिनी एकादशी के व्रत का पालन एक दिन पहले से शुरू हो जाता है। इसलिए व्रत के एक दिन पहले यानी 12 अप्रैल, रविवार की रात सात्विक भोजन करें और ब्रह्मचर्य का पालन करें। अगले दिन सुबह यानी 13 अप्रैल को जल्दी उठकर स्नान करने के बाद व्रत-पूजा का संकल्प लें।
- शुभ मुहूर्त से पहले पूजा की पूरी तैयारी कर लें। शुभ मुहूर्त शुरू होने पर घर में किसी साफ स्थान पर एक बाजोट रखकर इसके ऊपर भगवान विष्णु की प्रतिमा स्थापित करें। भगवान की प्रतिमा पर तिलक लगाएं, फूलों की माला पहनाएं और उनके सामने शुद्ध घी का दीपक भी जलाएं।
- अबीर, गुलाल, चावल, जनेऊ, कलावा, फूल, रोली आदि चीजें एक-एक करके भगवान विष्णु को चढ़ाएं। पूजा करते समय ऊं नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जाप करें। भगवान को भोग लगाएं। पूजा के बाद भगवान विष्णु की आरती कर विष्णु सहस्त्रनाम का जाप करें। 
- एकादशी व्रत कथा सुनें। यानी 14 अप्रैल को वरुथिनी एकादशी का व्रत करें।  इस प्रकार जो व्यक्ति वरुथिनी एकादशी का व्रत पूरे विधि-विधान से करता है, उसके सभी पापों का नाश होता है और वह भगवान विष्णु को प्रिय होकर सभी पापों से मुक्त हो जाता है।

 

Disclaimer
इस आर्टिकल में जो भी जानकारी दी गई है, वो ज्योतिषियों, पंचांग, धर्म ग्रंथों और मान्यताओं पर आधारित हैं। इन जानकारियों को आप तक पहुंचाने का हम सिर्फ एक माध्यम हैं। यूजर्स से निवेदन है कि वो इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।

 

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