Kajari Teej Vrat Katha: शिव-पार्वती की कृपा से कैसे बदली ब्राह्मण की किस्मत? पढ़ें कजरी तीज की ये रोचक कथा

Published : Aug 30, 2026, 11:09 AM IST
Kajari Teej Vrat Katha

सार

Kajari Teej Katha: भाद्रपद मास में कजरी तीज का व्रत किया जाता है। इस दिन महिलाएं भगवान शिव और देवी पार्वती की पूजा करती हैं। इस व्रत का महत्व अनेक धर्म ग्रंथों में बताया गया है।

Kajari Teej Story In Hindi: धर्म ग्रंथों के अनुसार तृतीया तिथि की स्वामी देवी पार्वती हैं। इसलिए हर तृतीया तिथि पर इनकी पूजा विशेष रूप से की जाती है। इनमें से भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि को कजरी तीज कहते हैं। इस बार कजरी तीज का व्रत 31 अगस्त, सोमवार को किया जाएगा। इस व्रत से जुड़ी एक विशेष कथा भी है जिसे सुने बिना इस व्रत का पूरा फल नहीं मिलता। आगे पढ़ें कजरी तीज व्रत की रोचक कथा…

कजरी तीज व्रत की कथा

बहुत समय पहले की बात है। किसी गांव में एक गरीब ब्राह्मण और उसकी पत्नी रहते थे। घर की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी, लेकिन ब्राह्मणी भगवान शिव और माता पार्वती की बहुत बड़ी भक्त थी। वह हर व्रत और पूजा पूरी श्रद्धा से करती थी।
भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की कजरी तीज यानी बड़ी तीज का दिन आया। ब्राह्मणी ने व्रत रखने का फैसला किया। पूजा के लिए उसे सवा किलो चने के सत्तू की जरूरत थी। उसने यह बात अपने पति को बताई, लेकिन ब्राह्मण के पास सत्तू खरीदने तक के पैसे नहीं थे।

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पत्नी की श्रद्धा देखकर ब्राह्मण परेशान हो गया। आखिरकार वह रात में एक साहूकार की दुकान से सत्तू बनाने का सामान लेने के लिए चोरी करने पहुंच गया। वह सामान उठा ही रहा था कि आवाज सुनकर साहूकार और उसके नौकर जाग गए और उन्होंने उसे पकड़ लिया।

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साहूकार ने जब उससे पूछताछ की तो ब्राह्मण ने हाथ जोड़कर पूरी बात बता दी। उसने कहा कि वह मजबूरी में दुकान पर आया है। उसकी पत्नी ने कजरी तीज का व्रत रखा है और पूजा के लिए सत्तू चाहिए, लेकिन उसके पास पैसे नहीं हैं।
साहूकार ने ब्राह्मण की तलाशी ली तो उसके पास सत्तू बनाने के सामान के अलावा कुछ भी नहीं मिला। उसकी हालत और पत्नी के प्रति उसकी निष्ठा देखकर साहूकार को उस पर दया आ गई। उसने ब्राह्मण को माफ कर दिया और उसकी पत्नी को अपनी धर्म बहन मान लिया।
इसके बाद साहूकार ने ब्राह्मण को सत्तू के साथ धन, कपड़े, गहने और पूजा का जरूरी सामान भी दिया। ब्राह्मण खुशी-खुशी घर लौट आया। मान्यता है कि कजरी माता और भगवान शिव-पार्वती की कृपा से ब्राह्मण दम्पति के जीवन में खुशियां लौट आईं और उनके घर में सुख-समृद्धि आने लगी।


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इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।

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