Kamika Ekadashi 2026: 9 या 10 अगस्त, कब करें कामिका एकादशी व्रत, कौन-सा मंत्र बोलें? जानें पूजा विधि और मुहूर्त

Published : Aug 07, 2026, 10:14 AM IST
Kamika Ekadashi 2026 Date

सार

Kamika Ekadashi Kab Hai: सावन मास में कामिका एकादशी का व्रत किया जाता है। इस एकादशी का महत्व अनेक धर्म ग्रंथों में बताया गया है। इस व्रत को करने से जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है।

Kamika Ekadashi 2026 Date: धर्म ग्रंथों के अनुसार श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को कामिका एकादशी कहते हैं। श्रावण भगवान शिव का महीना है और एकादशी तिथि के स्वामी स्वयं भगवान विष्णु हैं, इसलिए इस महीने की एकादशी तिथि का अधिक महत्व माना गया है। इस एकादशी का महत्व स्वयं भीष्म पितामह ने देवऋषि नारद को बताया था। आगे जानिए कामिका एकादशी 2026 की डेट, पूजा विधि, मुहूर्त और महत्व…

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कब है कामिका एकादशी 2026?

पंचांग के अनुसार, इस बार सावन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 8 अगस्त, शनिवार की दोपहर 01 बजकर 59 मिनिट से शुरू होगी जो अगले दिन यानी 09 अगस्त, रविवार की सुबह 11 बजकर 05 मिनिट तक रहेगी। चूंकि एकादशी तिथि का सूर्योदय 9 अगस्त को होगा, इसलिए इसी दिन कामिका एकादशी का व्रत किया जाएगा। इस दिन द्विपुष्कर योग भी रहेगा, जिसका इस व्रत का दोगुना फल मिलेगा।

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कामिका एकादशी 2026 शुभ मुहूर्त

सुबह 07:41 से 09:18 तक
सुबह 09:18 से 10:55 तक
दोपहर 12:06 से 12:58 तक (अभिजीत मुहूर्त)
दोपहर 02:09 से 03:46 तक

कामिका एकादशी व्रत विधि 

- कामिका एकादशी से एक दिन पहले यानी 8 अगस्त की रात को सात्विक भोजन करें और ब्रह्मचर्य का पालन करें। अगले दिन यानी 9 अगस्त की सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करेन के बाद हाथ में जल, चावल और फूल लेकर व्रत-पूजा का संकल्प लें।
- पूरे दिन व्रत के नियमों का पालन करें। पूजा शुरू करने से पहले पूजा सामग्री एक स्थान पर रख लें। जिस स्थान पर पूजा करनी है उसे गंगा जल या गौमूत्र छिड़ककर पवित्र करें और वहां लकड़ी की चौकी यानी पटिया रखकर साफ कपड़ा बिछाएं।
- इस चौकी पर भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। सबसे पहले भगवान विष्णु की प्रतिा पर कुमकुम से तिलक लगाएं। फूलों की माला पहनाएं और गाय के शुद्ध घी का दीपक जलाएं। मन ही मन में ऊं नमो
भगवते वासुदेवाय नम: मंत्र का जाप करें।
- भगवान विष्णु को एक-एक करके अबीर, गुलाल, इत्र, चावल, जौ, नारियल, जनेऊ व अन्य चीजें चढ़ाते रहें। भगवान को अपनी इच्छा अनुसार फल, मिठाई आदि चीजों का भोग लगाएं। भोग में तुलसी के पत्ते जरूर रखें। इसके बिना भोग पूरा नहीं माना जाता।
- इस तरह पूजा करने के बाद परिवार के साथ आरती करें। अगर पूरे दिन भूखे नहीं रह सकते तो एक समय फलाहार या गाय का दूध ले सकते हैं। रात को सोएं नहीं, भगवान की चौकी के पास बैठकर भजन-कीर्तन करते रहें या उनके मंत्रों का जप करें।
- 10 अगस्त, सोमवार की सुबह एक बार फिर से भगवान की पूजा करें। ब्राह्मणों को भोजन करवाएं व दान-दक्षिणा दें। ऐसा न कर पाएं तो गाय को चारा खिलाकर फिर स्वयं भोजन करें। इससे आपके जीवन में सुख-समृद्धि और शांति बनी रहेगी।


Disclaimer
इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।

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