Kanwar Yatra 2026: कांवड़िए क्यों पहनते हैं केसरिया कपड़े, क्यों खास है ये रंग?

Published : Jul 25, 2026, 11:20 AM IST
Kanwar Yatra Significance

सार

Kanwar Yatra Significance: सावन में हर कोई महादेव को अपने-अपने तरीके से प्रसन्न करने की कोशिश करता है। कांवड़ यात्रा भी इन उपायों में से एक है। कांवड़ यात्रा के दौरान भक्त केसरिया कपड़े पहनते हैं।

Kanwar Yatra Rules: सावन का महीना भगवान शिव की भक्ति के लिए बेहद खास माना जाता है। इस दौरान लाखों शिवभक्त कांवड़ यात्रा पर निकलते हैं। कांवड़िए पवित्र नदियों से जल लेकर पैदल यात्रा करते हैं और मंदिर पहुंचकर शिवलिंग का जलाभिषेक करते हैं। इस यात्रा में अधिकतर भक्त केसरिया रंग के कपड़े पहनते हैं। आखिर कांवड़ यात्रा में केसरिया कपड़े पहनने की परंपरा क्यों है और इस रंग का क्या महत्व है? आगे जानिए इन्हीं सवालों के जवाब…

ये भी पढ़ें-
Sawan 2026: सावन में रुद्राभिषेक का सही समय क्या है? जान लें वरना बेकार जाएगा पूजन

केसरिया रंग किसका प्रतीक है?

हिंदू धर्म में केसरिया रंग को त्याग, तपस्या, साधना और आध्यात्मिक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। कांवड़ यात्रा केवल एक धार्मिक यात्रा नहीं बल्कि कठिन साधना और संकल्प का हिस्सा भी होती है। कांवड़िए कई किलोमीटर तक पैदल चलते हैं और इस दौरान कई नियमों का पालन करते हैं। ऐसे में केसरिया वस्त्र उनकी भक्ति, तपस्या और भगवान शिव के प्रति समर्पण को दर्शाते हैं।

ये भी पढ़ें-
Grahan August 2026: ‘सूतक काल लगेगा या नहीं?’ अगस्त में होने वाले ग्रहण पर बड़ा अपडेट

केसरिया रंग को क्यों मानते हैं इतना पवित्र?

केसरिया रंग को सूर्य और अग्नि से भी जोड़कर देखा जाता है। अग्नि को शुद्धि और नकारात्मकता के अंत का प्रतीक माना जाता है। वहीं सूर्य ऊर्जा और शक्ति का प्रतीक है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कांवड़ यात्रा के दौरान केसरिया रंग भक्तों में उत्साह, ऊर्जा और सकारात्मक भावना बनाए रखने का प्रतीक माना जाता है।

कांवड़ियों की एकता का भी प्रतीक

कांवड़ यात्रा के दौरान अलग-अलग स्थानों से आए लाखों भक्त एक साथ यात्रा करते हैं। केसरिया कपड़े पहनने से सभी कांवड़िए एक समान दिखाई देते हैं और उनमें एकता की भावना मजबूत होती है। इसी कारण कांवड़ यात्रा के दौरान केसरिया रंग एक अलग पहचान बन चुका है। कांवड़ यात्रा में भक्त सामाजिक भेदभाव से ऊपर उठकर शिव की भक्ति में शामिल होते हैं। केसरिया वस्त्र इस सामूहिक भक्ति और भाईचारे को भी दर्शाते हैं।

साधु-संत भी पहनते हैं केसरिया भक्त

सांसारिक जीवन से वैराग्य ले चुके साधु-संत भी केसरिया कपड़े ही पहनते हैं। कुछ समय के लिए कांवड़ यात्री भी सांसारिक सुखों को त्याग कर साधु-संतों के समान जीवन बीताते हैं। यह भी एक कारण है कि कावड़ यात्री केसरिया कपड़े पहनकर स्वयं को इस संसार से अलग करने की कोशिश करते हैं।


Disclaimer
इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।

PREV

धार्मिक परंपराओं, मंदिरों, त्योहारों, यात्रा स्थलों और आध्यात्मिक ज्ञान से जुड़ी खबरें पढ़ें। पूजा पद्धति, पौराणिक कथाएं और व्रत-त्योहार अपडेट्स के लिए Religion News in Hindi सेक्शन देखें — आस्था और संस्कृति पर सटीक और प्रेरक जानकारी।

Read more Articles on

Recommended Stories

Sawan 2026: सावन में रुद्राभिषेक का सही समय क्या है? जान लें वरना बेकार जाएगा पूजन
Devshayani Ekadashi Vrat Katha: ये कथा सुने बिना नहीं मिलेगा व्रत का पूरा फल, जानें कैसे दूर हुई राजा मांधाता की परेशानी?