
Chaitra Navratri 2026 Devi Kushmanda Puja Vidhi: इस बार चैत्र नवरात्रि का पर्व 19 से 27 मार्च तक मनाया जाएगा। नवरात्रि की चतुर्थी तिथि की देवी कूष्मांडा हैं। इस बार देवी कूष्मांडा की पूजा 22 मार्च, रविवार को की जाएगी। पुराणों की मानें तो देवी कूष्मांडा की पूजा से सभी तरह के भय दूर होते हैं और लंबी उम्र और अच्छी सेहत का वरदान भी मिलता है। आगे जानें देवी कूष्मांडा की पूजा विधि, आरती, मंत्र आदि डिटेल…
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सुबह 08:03 से 09:33 तक
सुबह 09:33 से 11:03 तक
दोपहर 12:09 से 12:57 तक
दोपहर 02:04 से 03:34 तक
शाम 06:34 से 08:04 तक
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- 22 मार्च, रविवार की सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करें और व्रत-पूजा का संकल्प लें। दिन भर व्रत के नियमों का पालन करें।
- शुभ मुहूर्त में घर में एक साफ स्थान पर देवी कूष्मांडा की तस्वीर या प्रतिमा स्थापित कर सबसे पहले देवी को तिलक लगाएं।
- इसके बाद देवी कूष्मांडा को फूलों की माला पहनाएं। पूजन स्थान पर गाय के शुद्ध घी का दीपक जलाएं और पूजा करें।
- देवी कूष्मांडा को अबीर, गुलाल, जनेऊ , सुपारी आदि चीजें एक-एक करकें अर्पित करें। देवी को मालपुए का भोग लगाएं।
- इसके बाद देवी कूष्मांडा की आरती करें। पूजा के बाद संभव हो तो नीचे लिखे मंत्र का जाप कम से कम 108 बार करें-
या देवी सर्वभूतेषु मां कूष्मांडा रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।
कूष्मांडा जय जग सुखदानी। मुझ पर दया करो महारानी॥
पिगंला ज्वालामुखी निराली। शाकंबरी मां भोली भाली॥
लाखों नाम निराले तेरे। भक्त कई मतवाले तेरे॥
भीमा पर्वत पर है डेरा। स्वीकारो प्रणाम ये मेरा॥
सबकी सुनती हो जगदंबे। सुख पहुंचती हो मां अंबे॥
तेरे दर्शन का मैं प्यासा। पूर्ण कर दो मेरी आशा॥
मां के मन में ममता भारी। क्यों ना सुनेगी अरज हमारी॥
तेरे दर पर किया है डेरा। दूर करो मां संकट मेरा॥
मेरे कारज पूरे कर दो। मेरे तुम भंडारे भर दो॥
तेरा दास तुझे ही ध्याए। भक्त तेरे दर शीश झुकाए॥
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