Mahabharata Facts: महाभारत की सबसे रहस्यमयी नागकन्या, कैसे बनी अर्जुन की चौथी पत्नी?

Published : May 16, 2026, 04:24 PM ISTUpdated : May 16, 2026, 04:25 PM IST
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सार

Mahabharata Interesting Facts: महाभारत में ऐसे अनेक पात्र हैं जिनके बारे में कम ही लोगों को जानकारी है। ऐसी ही एक पात्र है उलूपी। ये एक नागकन्या थीं जिसका विवाह अर्जुन से हुआ था। इन्होंने ही एक बार अर्जुन को जीवनदान दिया था।

Interesting Facts About Arjun: अर्जुन महाभारत के मुख्य पात्रों में से एक थे। अर्जुन ने अपने जीवन काल में कईं विवाह किए, लेकिन द्रौपदी और सुभद्रा के अलावा अन्य पत्नियों के बारे में कम ही लोगों को पता है। अर्जुन की 2 अन्य पत्नियांभी थीं, इनमें से एक थी मणिपुर की राजकुमारी चिंदागदा और चौथ थी नागकन्या उलूपी। आपको ये जानकर आश्चर्य हुआ होगा कि एक नागकन्या अर्जुन की पत्नी कैसे बनी। आगे जानिए नागकन्या उलूपी से जुड़े रोचक फैक्ट…

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कौन थी, अर्जुन की पत्नी उलूपी ?

उलूपी नागलोक की राजकुमारी थीं। उनके पिता का नाम नागराज कौरव्य था जो गंगा नदी के नीचे बसे नागलोक पर शासन करते थे। पुराणों की मानें तो उलूपी का विवाह पहले एक नागपुरुष से हुआ था लेकिन गरुड़देव ने उसका वध कर दिया। इसके बाद उलूपी अपने पिता के साथ नागलोक में विधवा के रूप में रहने लगीं।

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कहां हुई अर्जुन और उलूपी की पहली मुलाकात?

महाभारत के अनुसार नियम तोड़ने के कारण एक बार अर्जुन को 12 वर्ष तक वनवास पर जाना पड़ा। इस दौरान अर्जुन तीर्थयात्रा करते हुए गंगा नदी तक पहुँचे। जब वे स्नान कर रहे थे, तभी उलूपी ने उन्हें देखा और उन पर मोहित हो गईं। उलूपी ने अपनी शक्ति से अर्जुन को जल के भीतर खींच लिया और नागलोक ले गईं। वहां उन्होंने अर्जुन से प्रेम प्रकट किया और विवाह का प्रस्ताव रखा।

अर्जुन ने किया विवाह से इंकार?

उलूपी द्वारा दिए गए विवाह प्रस्ताव को अर्जुन ने इंकार कर दिया क्योंकि वनवास के दौरान वे ब्रह्मचर्य व्रत का पालन कर रहे थे। तब उलूपी ने उन्हें समझाया कि पृथ्वी लोक के नियम नागलोक में किसी भी तरह मान्य नहीं होते। उलूपी ने यह भी कहा कि उनका प्रेम सच्चा है और अर्जुन का साथ पाना ही उनका उद्देश्य है। अंततः अर्जुन मान गए और दोनों का विवाह हुआ। अर्जुन से उलूपी को एक पुत्र है जिसका नाम इरावान रखा गया।

उलूपी ने बचाई अर्जुन की जान

युधिष्ठिर के हस्तिनापुर का राजा बनने के बाद पांडवों ने अश्वमेध यज्ञ किया। इस यज्ञ के घोड़े का रक्षक अर्जुन को बनाया गया। यज्ञ का घोड़ा घूमते-घूमते मणिपुर पहुंच गया। यहां के राजा थे बभ्रुवाहन, जो अर्जुन और चित्रांगदा के पुत्र थे। बभ्रुवाहन से अर्जुन का युद्ध हुआ और एक श्राप के कारण अपने ही पुत्र के हाथों उनकी मृत्यु हो गई। तब उलूपी ने नागलोक से नागमणि लाकर अर्जुन को पुनर्जीवित कर दिया।


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इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।

 

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