Meenakshi Amman Temple: हिंदू धर्म में अनेक देवी-देवताओं के बारे में मान्यता है। इनमें से कुछ ऐसे भी हैं जिनके बारे में कम ही लोगों को जानकारी है। ऐसी ही एक देवी हैं मीनाक्षी अम्मन। इनकी पूजा दक्षिण भारत में विशेष रूप से की जाती है।
Meenakshi Amman History: भारत धार्मिक विविधताओं वाला देश हैं। यहां स्थानीय रूप से भी अनेक देवी-देवताओं की पूजा की जाती है। ऐसी ही एक देवी हैं मीनाक्षी अम्मन यानी देवी मीनाक्षी। इन्हें माता पार्वती का अवतार माना जाता है। दक्षिण भारत में इनके अनेक प्रसिद्ध मंदिर भी हैं। इनका सबसे बड़ा मंदिर मदुरै में स्थित है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार देवी मीनाक्षी तीन स्तनों के साथ जन्मी थीं और उन्होंने बैकुंठ को भी जीत लिया था। आगे जानें देवी मीनाक्षी की ये रोचक कथा…

किसकी पुत्री थीं देवी मीनाक्षी?
प्रचलित कथा के अनुसार दक्षिण भारत के मदुरै राज्य में मलयध्वज पांड्य नाम के एक राजा थे। उनकी पत्नी का नाम कांचनमाला था। विवाह के काफी समय बाद उनकी कोई संतान नहीं हुई। ये देख राजा मलयध्वज ने संतान प्राप्ति के लिए कठोर यज्ञ किया। यज्ञ की अग्नि से एक कन्या प्रकट हुई, जिसके तीन स्तन थे। तभी आकाशवाणी हुई कि यह कन्या साधारण नहीं है और जिस पुरुष को यह अपना पति मानेगी, उसे देखते ही इसका तीसरा स्तन स्वयं गायब हो जाएगा।
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बैकुंठ पर भी कर लिया अधिकार
अग्नि से उत्पन्न उस कन्या की आंखें मछली के समान थीं, इसलिए राजा मलयध्वज ने उसका नाम मीनाक्षी रख दिया। राजा ने उस कन्या को एक योद्धा की तरह प्रशिक्षित किया गया। देवी मीनाक्षी बेहद पराक्रमी योद्धा थीं। देवी मीनाक्षी ने जब पृथ्वी के कई राज्यों को जीत लिया तो इसके बाद वे स्वर्ग और बैकुंठ लोक भी गईं और वहां भी जीत प्राप्त की।
शिवजी को देखते ही गायब हुआ तीसरा स्तन
बैकुंठ जीतने के बाद जब देवी मीनाक्षी कैलाश पर्वत पहुंचीं तो वहां भगवान शिव को देखते ही उनका तीसरा स्तन गायब हो गया और उन्हें समझ आ गया कि यही उनके पति हैं। भगवान शिव जानते थे कि मीनाक्षी स्वयं देवी पार्वती का अवतार हैं। बाद में महादेव ने सुंदरेश्वर रूप में मदुरै आकर देवी मीनाक्षी से विवाह किया।
कहां देवी मीनाक्षी का प्राचीन मंदिर?
वैसे तो दक्षिण भारत में देवी मीनाक्षी के अनेक मंदिर हैं लेकिन सबसे प्राचीन मंदिर मदूरै में स्थित है। यहां देवी मीनाक्षी और भगवान सुंदरेश्वर की पूजा होती है। हर साल यहां मीनाक्षी तिरुकल्याणम का भव्य आयोजन होता है, जिसमें देवी-देवता के दिव्य विवाह की परंपरा निभाई जाती है। इस मंदिर में दर्शन के लिए रोज हजारों लोग आते हैं।
Disclaimer
इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।
