
Ujjain Mahakal Second Sawari: भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंग विश्व प्रसिद्ध हैं। इनमें से तीसरा ज्योतिर्लिंग है महाकालेश्वर जो मध्य प्रदेश के उज्जैन में स्थित है। बाबा महाकाल को यहां के लोग अपना राजा मानते हैं। हर सावन सोमवार पर भगवान महाकाल की सवारी निकाली जाती है। ऐसी मान्यता है कि सावन मास के दौरान राजा महाकाल अपनी प्रजा का हाल जानने निकलते हैं। इस बार सावन की दूसरी सवारी 10 अगस्त को निकाली गई।
शाम 4 बजे शुरू हुई सवारी
परंपरा के अनुसार दोपहर 3 बजे महाकाल मंदिर के सभा मंडप में पहले भगवान के मुघौटे की पूजा की गई। इस पूजा में जिले के बड़े अधिकारी और जनप्रतिनिधि शामिल हुए। दोपहर 4 बजे बाबा महाकाल की सवारी मंदिर से बाहर निकली। यहां पुलिस द्वारा भगवान महाकाल को गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। इसके बाद सवारी अपने तय मार्गों से होकर गुजरी। लाखों भक्तों ने अपने राजा बाबा महाकाल के दर्शन किए और जय श्री महाकाल का उद्षोघ कर माहौल को शिवमय बना दिया।
लोकनृत्य थीम पर निकली दूसरी सवारी
प्रशासन ने इस बार महाकाल सवारी के लिए अलग-अलग थीम तैयार की है। इसी के अंतर्गत बाबा महाकाल की दूसरी सवारी की थीम लोक नृत्यों पर आधारित रही। इसमें प्रदेश के अलग-अलग जिलों से आए लोक कलाकारों ने अपनी प्रस्तुति दी। साथ ही अन्य भजन मंडली भी अपनी प्रस्तुति देते हुए नजर आईं।
ये रहा सवारी का मार्ग
महाकाल मंदिर से निकलकर बाबा महाकाल की पालकी गुदरी चौराहा, कहारवाड़ी, रामानुजकोट होती हुई राम घाट पहुंची। यहां क्षिप्रा नदी के जल से महाकाल का अभिषेक किया गया। इसके बाद सवार दानी गेट, टंकी चौराहा, गोपाल मंदिर और पटनी बाजार होते हुए पुन: मंदिर परिसर में आई।
परंपरा के अनुसार सावन के प्रत्येक सोमवार को बाद भाद्रपद मास के पहले दो सोमवार को भी बाबा महाकाल की सवारी निकाली जाती है। इनकी डेट्स इस प्रकार हैं-
तीसरी सवारी- 17 अगस्त
चौथी सवारी- 24 अगस्त
पांचवी सवारी- 31 अगस्त (भादौ मास)
छठी सवारी- 7 सितंबर (भादौ मास)
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