Mahakal Temple Ujjain: बाबा महाकाल बने दूल्हा, वीडियो में देखें अनोखा रूप

Published : Feb 16, 2026, 09:05 AM IST
Mahakal Temple Ujjain

सार

Mahakaleshwar Mandir: उज्जैन में स्थित महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग विश्व प्रसिद्ध है। यहां की परंपराएं भी इस देव स्थान को और भी खास बनाती है। महाशिवरात्रि के दूसरे दिन यहां बाबा महाकाल का दूल्हे के रूप में श्रृंगार किया जाता है।

Mahakal Mandir: उज्जैन को मध्य प्रदेश की धार्मिक राजधानी कहा जाता है क्योंकि यहां स्थापित है 12 ज्योतिर्लिंगों में तीसरे स्थान पर आने वाले बाबा महाकाल। महाकाल मंदिर में महाशिवरात्रि का पर्व बहुत ही अलग तरीके से मनाया जाता है। यहां शिव नवरात्रि का उत्सव 9 दिन पहले से ही शुरू हो जाता है जिसमें बाबा महाकाल को दूल्हे के रूप में पूजा जाता है और महाशिवरात्रि के दूसरे दिन सेहरा चढ़ाया जाता है। बाबा महाकाल का ये रूप साल में सिर्फ एक बार ही देखने को मिलता है। इस बार महाशिवरात्रि के दूसरे दिन यानी 16 फरवरी, सोमवार को भी बाबा महाकाल का दूल्हे के रूप में आकर्षक श्रृंगार किया गया। आगे वीडियो में देखिए बाबा महाकाल के दूल्हा स्वरूप…

3 क्विंटल वजनी है बाबा महाकाल का सेहरा

बाबा महाकाल को चढ़ाया गया सेहरा लगभग 3 क्विंटल वजनी है। इस सेहरे में फूलों के अलावा विभिन्न प्रकार की पत्तियों और फलों का उपयोग भी किया जाता है। दूल्हे के रूप में भगवान महाकाल को चंद्र मुकुट, छत्र, त्रिपुंड और अन्य आभूषणों से श्रृंगारित किया है। भक्त दोपहर 12 बजे तक बाबा महाकाल के इस रूप के दर्शन कर सकेंगे। इसके बाद भस्मारती की जाएगी।

दोपहर में होगी भस्मारती

भगवान महाकाल की भस्मारती विश्व प्रसिद्ध है। ये आरती रोज सुबह 4 बजे की जाती है लेकिन साल में सिर्फ एक बार महाशिवरात्रि के दूसरे दिन बाबा महाकालकी भस्मारती दोपहर में करने की परंपरा है ताकि भक्तों के निरंतर अपने आराध्य के दर्शन हो सकें। भस्म आरती के बाद भोग आरती होगी तथा शिवनवरात्रि का पारणा किया जाएगा। संध्या आरती शाम 6:30 बजे, शयन आरती रात 10:30 बजे होगी। रात 11 बजे भगवान के पट मंगल होंगे।

क्यों खास है महाकाल ज्योतिर्लिंग?

महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग से जुड़ी अनेक मान्यताएं और परंपराएं इन्हें खास बनाती हैं। ये ज्योतिर्लिंग इसलिए भी विशेष है क्योंकि ये एकमात्र दक्षिणमुखी ज्योतिर्लिंग है। दक्षिण दिशा के स्वामी यमराज हैं जिन्हें काल भी कहा जाता है। काल के काल होने से इनका नाम महाकाल हुआ। महाकाल ज्योतिर्लिंग की कथा शिवपुराण में भी बताई गई है। उसके अनुसार दूषण नाम के दैत्य का वध करने के लिए महादेव उज्जैन में प्रकट हुए थे और इसी स्थान पर महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग के रूप में स्थापित हो गए।

 

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